राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डिलीवरी के बाद किडनी खराब होने के मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पिछले करीब 70 दिनों से डायलिसिस के सहारे जिंदगी जी रही पांच महिलाएं अब मीडिया के सामने आई हैं और उन्होंने असंतोष जताया है। महिलाओं ने रोते हुए मीडिया के कैमरों के सामने बताया कि वह दो महीने से अस्पताल में भर्ती हैं। महिलाओं ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अब सरकार या तो हमारे किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करवाए, नहीं तो हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दे।
इन महिलाओं का कहना है कि वे अब बार-बार डायलिसिस का दर्द सहन नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने दो दिन पहले इन महिलाओं के परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की थी। इस ज्ञापन में प्रशासन को फैसला लेने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया था। हालांकि, प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया।
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पूरा मामला समझिए
यह मामला मई 2026 का है, जब कोटा के जेके लोन अस्पताल और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव यानी डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई थी। पीड़ितों के परिजनों का आरोप है कि मेडिकल लापरवाही और कथित रूप से घटिया दवाओं के इस्तेमाल के कारण उनकी किडनियां खराब हो गईं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सीजेरियन ऑपरेशन के बाद इन सभी महिलाओं की किडनियां फेल हो गई थीं। पांच महिलाएं अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें इन्हें हर दूसरे-तीसरे दिन डायलिसिस करवाना पड़ता है, जो एक बहुत ही दर्दनाक प्रक्रिया है।
डायलिसिस कराने से इनकार
प्रशासन को दिए 48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद महिलाओं ने डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया है। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्हें 70 दिन से ज्यादा अस्पताल में भर्ती हुए हो गए हैं और हर दूसरे, तीसरे दिन उन्हें डायलिसिस करवाना पड़ता है। महिलाओं ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक वे डायलिसिस के सहारे जिंदा रहेंगी। महिलाओं का कहना है कि वे अस्पताल सिर्फ बच्चे को जन्म देने आई थीं, लेकिन अब महीनों से अस्पताल में ही जिंदगी गुजर रही है। एक महिला ने बताया कि प्रसव के बाद से वह अपने नवजात बच्चे को ठीक से गोद तक नहीं ले पाई है।
किडनी ट्रांसप्लांट की मांग
महिलाओं की मांग है कि उनकी किडनी ट्रांसप्लांट करवाई जाए। उनका कहना है कि वे जैसी अस्पातल में आई थीस उन्हें वैसे ही ठीक करके घर भेजा जाए। महिलाओं ने कहा कि या तो हमारा ट्रांसप्लांट कराओ या फिर हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दो। महिलाओं ने अब डायलिसिस का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। बुधवार को पिंकी और आरती का डायलिसिस होना था, लेकिन दोनों ने इसके लिए साफ मना कर दिया। डायलिसिस ना होने के कारण आरती की तबीयत खराब हो गई और उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा।
अस्पातल ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर न्यू मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल डॉक्टर निलेश जैन ने कहा है कि सभी पांच महिलाओं की हालत फिलहाल स्थिर है और जरूरत के अनुसार उनका डायलिसिस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत तीन से छह महीने तक इंतजार किया जाता है, उसके बाद ही यह तय किया जाता है कि मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत है या नहीं। उनका कहना है कि अभी ट्रांसप्लांट को लेकर अंतिम फैसला लेना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि अस्पातल में हर 24 घंटे में 80 डायलिसिस होते हैं और किसी को दिक्तत नहीं आ रही है। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी है कि वे अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करवाएं और अफवाहों पर ध्यान ना दें।
डॉ. जैन के अनुसार महिलाओं का इलाज मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है और उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यदि कोई मरीज डायलिसिस से इनकार करता है तो इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी जाएगी, क्योंकि इलाज रोकने से उनकी जान को खतरा हो सकता है।