संजय सिंह, पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। पप्पू यादव ने पटना समेत बड़े शहरों में लड़कियों के शोषण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है। उनके बयान के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग भी सक्रिय हो गया है और मामला अब टकराव की स्थिति में पहुंचता दिख रहा है।
पूर्णिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पप्पू यादव ने दावा किया कि पटना के कुछ गर्ल्स हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं का शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लड़कियों को पदाधिकारियों के सामने परोसा जाता है और नेता बेटियों की बोली लगा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर कुछ वीडियो क्लिप भी दिखाए और दावा किया कि ये स्टिंग ऑपरेशन का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि कई मामलों की श्रृंखला है, जिसमें संगठित तरीके से शोषण हो रहा है।
यह भी पढ़ें: 'भारत और चीन नरक', ट्रंप ने पोस्ट शेयर करके घटियापन दिखा दिया
पप्पू यादव ने कहा कि यह पूरा तंत्र नेताओं और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे बिना आधार के कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि कानून के तहत सामने आई सामग्री के आधार पर मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं और बच्चियों के साथ हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है, चाहे इसके लिए कितनी भी आलोचना क्यों न झेलनी पड़े?
विवादित बयान पर घिरे पप्पू यादव
अपने बयान में उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा कि अगर बेटियों के साथ अन्याय हो रहा है तो कोई न कोई तो इसके खिलाफ खड़ा होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक साहस और सामूहिक प्रयास से सुनिश्चित की जा सकती है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब पप्पू यादव अपने बयान को लेकर विवादों में आए हैं। इससे पहले उन्होंने यह बयान दिया था कि 90 फीसदी महिलाएं बिना नेताओं के कमरों में जाए राजनीति में आगे नहीं बढ़ सकतीं। उनके इस बयान का खूब विरोध हुआ। राष्ट्रीय महिला आयोग ने नोटिस भी जारी किया।
यह भी पढ़ें: बीकाजी भुजिया वाले शिवरतन अग्रवाल का निधन, घर-घर पहुंचाया बीकानेरी स्वाद
हालांकि पप्पू यादव ने आयोग के नोटिस को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। बताया गया कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से नोटिस को कचरे के डिब्बे में डालने जैसी टिप्पणी की। इस पर बिहार महिला आयोग अध्यक्ष अप्सरा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव का यह रवैया न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि महिला आयोग की गरिमा के खिलाफ भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद ने उनके खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की और एक नेता के साथ उनकी तस्वीर साझा कर अनुचित बयानबाजी की।
3 मई तक पप्पू यादव को देना होगा जवाब
महिला आयोग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए एक बार फिर स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने पप्पू यादव को नोटिस जारी कर 3 मई को साक्ष्य सहित उपस्थित होने का निर्देश दिया। साथ ही, यह भी संकेत दिया गया है कि आयोग की गरिमा को ठेस पहुंचाने के मामले में उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां पप्पू यादव अपने आरोपों को महिलाओं के हित में उठाई गई आवाज बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिला आयोग उनके बयान और व्यवहार को अनुचित और अपमानजनक मान रहा है। अब देखना होगा कि यह मामला आगे किस दिशा में बढ़ता है और क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं?