पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह झोटा की मौत के बाद से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले तमाम राजनीतिक दल अपना चुनावी कैंपेन नशे के मुद्दे पर ही खड़ा कर रहे हैं। पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से आए दिन नशे से जुड़े चिंताजनक मामले सामने आ रहे हैं। इस बीच पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान राजा वडिंग ने एक अहम बयान दिया। उन्होंने सिंथेटिक नशों से निपटने के लिए रवायती नशों यानी अफीम और भुक्की को विकल्प के तौर पर अपनाने की बात कही है।
इससे पहले भी राजा वडिंग इस तरह के बयान दे चुके हैं। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने मई 2025 में बठिंडा के भुच्चो खुर्द में आयोजित संविधान बचाओ रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि चिट्टे जैसे जानलेवा सिंथेटिक नशों को कम करने के लिए अफीम और भुक्की जैसे पारंपरिक नशों को लाना पड़ेगा। उनका तर्क था कि लंबे समय से अफीम और भुक्की का सेवन करने वाले लोगों की तुलना में चिट्टे का इंजेक्शन लेने वाले लोगों की हालत तेजी से बिगड़ती है। उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा की बात भी कही थी। मौदूगा प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की बात कही है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि रवायती नशे होते क्या हैं और डॉक्टरों की इन पर क्या राय है।
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क्या होते हैं रवायती नशे?
पंजाब में रवायती नशों से आमतौर पर अफीम, भुक्की और डोडा जैसे पदार्थों को समझा जाता है। ये सभी अफीम के पौधे से प्राप्त होते हैं और इनमें ओपिओइड तत्व मौजूद होते हैं। इनका सेवन आमतौर पर खाने या पेय पदार्थों के साथ किया जाता है। दूसरी तरफ चिट्टा यानी हेरोइन एक अत्यधिक नशे की लत लगाने वाला ओपिओइड है, जिसका इस्तेमाल कई लोग सूंघकर या इंजेक्शन के जरिए करते हैं।
इसके अलावा सिंथेटिक नशों में कृत्रिम तरीके से तैयार किए गए ड्रग्स और कुछ ऐसी दवाएं भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नशे के लिए किया जाता है। ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम और कुछ अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का दुरुपयोग भी पंजाब में चिंता का विषय है। यानी रवायती और सिंथेटिक नशों का अंतर उनके स्रोत और बनाने के तरीके में है, न कि इस आधार पर कि एक नुकसानदायक है और दूसरा सुरक्षित। नुकसान रवायती नशों से भी होता है।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
रवायती नशों और अन्य नशों के बीच छिड़ी बहस पर पहले भी कई रिसर्च हो चुकी हैं। इस बहस में एक महत्वपूर्ण रिसर्च जून 2025 में इंडियन जर्नल ऑफ साइकियाट्री में पब्लिश हुई थी। AIIMS जोधपुर और AIIMS दिल्ली के रिसर्चर्स ने प्राकृतिक अफीम का सेवन करने वाले 72 और हेरोइन का इस्तेमाल करने वाले 172 मरीजों का तुलनात्मक अध्ययन किया था। इसमें पाया गया कि अफीम का सेवन करने वाले मरीजों में नशे से जुड़ी कुल समस्याएं हेरोइन लेने वालों के मुकाबले कम थीं।
हालांकि, शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में ऐसा स्पष्ट अंतर नहीं मिला। रिसर्चर्स ने यह भी माना कि प्राकृतिक अफीम को हेरोइन से कम नुकसानदायक मानने के पीछे सीमित वैज्ञानिक प्रमाण हैं। इसलिए इस रिसर्च को अफीम या भुक्की के सेवन की मंजूरी नहीं माना जा सकता। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, अफीम से प्राप्त पदार्थों सहित सभी ओपिओइड नशे की निर्भरता पैदा कर सकते हैं। इनका अधिक सेवन सांस लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है और ओवरडोज से मौत भी हो सकती है।
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पंजाब में हालात क्यों गंभीर हैं?
राज्य में नशे की समस्या केवल चिट्टे तक सीमित नहीं रह गई है। 2015 के पंजाब ओपिओइड डिपेंडेंस सर्वे (PODS) में राज्य में लगभग 2.3 लाख ओपिओइड पर निर्भर लोगों का अनुमान लगाया गया था। हाल के वर्षों में नशे की सप्लाई में ड्रोन, सीमा पार तस्करी और मेडिकल स्टोर से मिलने वाली नशे की दवाओं के दुरुपयोग ने चुनौती बढ़ाई है। नशे के कारण लोगों की मौत हो रही है और इनका विरोध करने वाले परविंदर सिंह झोटा जैसे कार्यकर्ता हिंसा का शिकार हो रहे हैं।