पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक और वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का (हरविंदर सिंह फुल्का) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का फैसला किया है। यह पंजाब बीजेपी के लिए एक बड़ा फायदा माना जा रहा है। फुल्का बुधवार को दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय पर औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हुए।
इस मौके पर केंद्र सरकार के मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़, दिल्ली बीजेपी प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह कदम सात साल बाद फुल्का की सक्रिय राजनीति में वापसी है।
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सरकार पर उठाए सवाल
बीजेपी में शामिल होने के वक्त फुल्का ने कहा कि उनका झुकाव हमेशा से बीजेपी की तरफ था क्योंकि बीजेपी ही ऐसी पार्टी थी जिसने 1984 के सिख दंगों के बाद पीड़ितों के लिए आवाज उठाने वाली पार्टी रही है। उन्होंने कहा कि वह 2014 से लेकर 2017 तक सिर्फ तीन सालों के लिए आम आदमी पार्टी में रहे, बाकी समय तक उनका जुड़ाव बीजेपी के साथ ही था।
आगे उन्होंने कहा पंजाब मे लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बहुत ही खराब है और आए दिन लोगो को फिरौती का कॉल आती हैं लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। साथ ही उन्होंने पंजाब में खराब होती जमीनों के बारे में भी कहा कि आने वाले समय में पंजाब की जमीनें बंजर हो जाएंगी लेकिन सरकार इस पर भी कोई ध्यान नहीं दे रही है।
कौन हैं एचएस फुल्का?
एचएस फुल्का सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए पूरे देश में मशहूर हैं। उन्होंने कई दशकों तक पीड़ित परिवारों के केस लड़े, अक्सर वह इसके लिए कोई फीस नहीं ली और कई मामलों को फिर से ओपन करवाकर दोषियों को सजा दिलाई।
उनका जन्म पंजाब के बरनाला जिले के भदौर गांव में हुआ था। वह किसानों के बीच जैविक खेती और पानी बचाने जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी काम करते रहे हैं। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 2013 में आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने के साथ हुई। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने लुधियाना से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। इसके बाद 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर दाखा विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया जिसकी वजह से पंजाब में उनका कद काफी ऊंचा हो गया।
हालांकि, 2018 में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। इसका कारण उन्होंने बताया कि 2015 के पवित्र स्थलों की बेअदबी के मामलों में बहुत धीमी गति से न्याय मिल रहा है, इसलिए उन्होंने विरोधस्वरूप इस्तीफा दे दिया है।
इसके बाद 2019 में उन्होंने आम आदमी पार्टी को भी छोड़ दिया और पूरी तरह से अपनी वकालत के काम में लग गए। दिसंबर 2024 में उन्होंने फिर एक बार फिर राजनीति में दोबारा प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन पार्टी के अंदर विरोध के कारण वह पार्टी ज्वाइन नहीं कर सके। हालांकि, पार्टी में गुटबाजी की वजह से उन्हें वहां से भी बाहर निकलना पड़ा और अब वह बीजेपी में आ गए हैं।
पंजाब में बीजेपी को फायदा
फुल्का का बीजेपी में शामिल होना पंजाब में सिख और पंथिक चेहरों को जोड़ने की बीजेपी की कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पार्टी को पंजाब में एक विश्वसनीय सिख चेहरा मिल गया है, जिसकी साख ईमानदारी और 1984 दंगों के पीड़ितों के प्रति समर्पित व्यक्ति के रूप में है।
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पिछले कुछ समय में कई अन्य सिख नेता भी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, जैसे मंजिंदर सिंह सिरसा, हरमीत सिंह कलका और हाल ही में कुछ अकाली दल के नेता। यह सब 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।