महाराष्ट्र के संभाजीनगर से एक रोचक मामला सामने आया है। रेलवे के जुडिशियल मैजिस्ट्रेट को नांदेड़ डिवीजन के DRM के खिलाफ अवमानना का केस चलाने की चेतावनी दे डाली है। आरोप है कि मई के महीने में चिट्ठी लिखने के बावजूद संभाजीनगर रेलवे स्टेशन के VIP रूम के पुराने सोफे नहीं बदलवाए गए और पुराने सोफे में खटमल हैं। जज ने पिछली चिट्ठी में लिखा था कि इस स्टेशन पर कई VIP जैसे कि हाई कोर्ट के जज आते हैं और उन्हें दिक्कत होती है। अब DRM को चेतावनी दी गई है कि अगर 30 सितंबर को वह कोर्ट में पेश होकर जवाब नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना के कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इस बार रेलवे के जुडिशियल मैजिस्ट्रेस एस एम आहेर इसलिए भड़के हुए हैं क्योंकि उन्होंने 20 मई 2026 को DRM, नांदेड़ डिवीजन को चिट्ठी लिखी थी लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि डीआरएम की यह हरकत जुडिशियल मैजिस्ट्रेट के निर्देशों का अपमान और अवमानना है। उन्होंने यह भी कहा है कि वीआईपी रूम के सोफे खराब होने के चलते 'बहुत अहम लोगों' को वीआईपी रूम के बजाय अपनी कार में बैठना पड़ रहा है। अब उनकी यह चिट्ठी वायरल हो गई है।
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पहली चिट्ठी में क्या था?
औरंगाबाद रेलवे के जुडिशियल मैजिस्ट्रेट एस एम आहेर ने पहली चिट्ठी 20 मई 2026 को लिखी थी। इस चिट्ठी में वह लिखते हैं, 'मैं आपको बताना चाहता हूं कि छत्रपति संभाजीनगर स्टेशन के वीआईपी रूम के सोफा बहुत बुराने हैं और उनमें बहुत सारे खटमल हैं। माननीय जस्टिस मंजुषा देशपांडे और उनके पति ने इसकी सूचना मुझे दी। इसलिए आपको निर्देश दिया जाता है कि वीआईपी रूम में पेस्ट कंट्रोल कराएं और सोफा बदलवाएं ताकि माननीय जजों को इस तरह की समस्या न हो।'
दूसरी चिट्ठी में क्या लिखा है?
उन्होंने दूसरी चिट्ठी 19 सितंबर को लिखी है और इसे 'कारण बताओ नोटिस' कहा है। इस चिट्ठी में एस एम आहेर लिखते हैं, 'मैंने आपको निर्देश दिए थे कि पेस्ट कंट्रोल कराएं और सोफा बदलवाएं। बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच के 15 जज यहां बैठते हैं और ज्यादातर ट्रेन से यात्रा करते हैं। इन जज को वीआईपी रूप में इंतजार करना होता है। वीआईपी रूम के सभी सोफा बेहद खराब हैं और उन पर हाई कोर्ट के माननीय जज का बैठना बहुत खराब है।'
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उन्होंने आगे लिखा है, 'खराब सोफे के चलते माननीय जजों को अपनी कार में इंतजार करना पड़ता है। अभी तक सोफा नहीं बदला गया है। आपने ना तो कोई कार्रवाई की और ना ही मेरे लेटर का जवाब दिया। यह निर्देशों का अपमान और अवमानना है। इससे हाई कोर्ट के माननीय जजों को दिक्कत हुई है इसलिए आपको कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है कि आपके खिलाफ अवमानना का केस क्यों न चलाया जाए? आपको निर्देश दिया जाता है कि 30 सितंबर से पहले कोर्ट में पेश होकर खुद जवाब दें। अगर इन निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है तो आपके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाएगी।'