कभी हाथों में बंदूक थामे और जंगल में जीवन बिताने वाली माओवादी महिलाओं ने पहली बार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रैंप वॉक करके न केवल जलवा बिखेरा, बल्कि मुख्यधारा में आने का भी आगाज किया। इन महिलाओं के जीवन का एक अहम समय बस्तर के जंगलों में बीता। मगर असली बदलाव आत्मसमर्पण करने के बाद आया।
राजधानी रायपुर में नेशनल हैंडलूम डे पर ट्राइबल फैशन शो इवेंट का आयोजन किया गया। इस शो में पूर्व नक्सल महिलाओं ने हाथ से बने अपने सांस्कृतिक परिधान पहनकर रैंप वॉक किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय और पूर्व सीएम रमन सिंह समेत तमाम नेता और अन्य लोग पहुंचे।
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बस्तर के घने जंगलों में कभी हथियार उठाने वालीं महिला नक्सली जब रैंप पर उतरीं तो लोगों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। सोशल मीडिया पर रैंप वॉक के कई वीडियो वायरल हैं। लोग सरकार की इस पहल की खूब सराहना करने में जुटे हैं। समाज से लगभग कट चुकीं इन महिलाओं के मुख्यधारा में लौटने से हर कोई खुश है।
रैंप वॉक में भाग लेने वाली एक महिला ने बताया कि मुंबई से आए लोगों ने छह दिन की ट्रेनिंग दी थी। वह पहले नक्सली थी। इसी साल सरेंडर किया था। महिला ने बताया कि वह पहली बार राजधानी रायपुर गई थी। वहां उसे बहुत अच्छा लगा।
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आत्मसमर्पण करने वाली एक महिला ने बताया, 'मैं पामेड एरिया कमिटी में काम करती थी। मैंने 2026 में सरेंडर किया। हम हाल ही में रायपुर गए थे। वहां हमें मुंबई से आए लोगों ने ट्रेनिंग दी... बड़े-बड़े मंत्री भी आए थे। ट्रेनिंग छह दिन की थी। मैंने पहली बार ऐसा कुछ किया था। हमें मजा आया।'