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आदिवासियों का इलाज करने गए थे, प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार हुए डॉक्टर

ओडिशा में आदिवासियों के लिए काम कर रहे डॉ. रैंडल सेकेरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर खनन विरोधी प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने और गंभीर आपराधिक आरोप लगाए गए हैं।

Randal Sequeira

रैंडल सीक्वेरा, Photo Credit- Social Media

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ओडिशा के दूर-दराज इलाकों में आदिवासियों के लिए काम करने वाले एक डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है। डॉक्टर रैंडल सेकेरा पर खनन विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में हिंसा भड़काने का आरोप है। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि अप्रैल में रायगड़ा जिले में बक्साइट खनन और सड़क बनाने को लेकर हुई हिंसक झड़प में रैंडल की भूमिका सामने आई थी। 


कालाहांडी पुलिस ने 16 अक्टूबर को भवानीपटना स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया था। उनके साथ उनके एक सहयोगी लक्ष्मण नायक को भी हिरासत में लिया गया। डॉक्टर पर हत्या के प्रयास, दंगा भड़काने और हथियार रखने जैसे कई गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं। 

 

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कौन हैं डॉ. रैंडल सेकेरा?

39 साल के डॉ. रैंडल सेकेरा का परिवार मूल रूप से कर्नाटक के मंगलुरु से है। उनका बचपन मुंबई में बीता। उन्होंने बेंगलुरु के प्रतिष्ठित सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज से MBBS और राजस्थान के सवाई मानसिंह अस्पताल से इंटरनल मेडिसिन में MD की डिग्री ली है। साल 2017 में वे ओडिशा के कालाहांडी जिले में आ बसे। इसके बाद वह पूरी तरह से आदिवासी इलाकों के स्वास्थ्य सुधार में जुट गए। 


वह गांवों में घूम-घूमकर मलेरिया, टीबी जैसी बीमारियों का इलाज करते थे। साथ ही प्रेग्नेंट गर्भवती महिलाओं तथा कुपोषित बच्चों के लिए जागरूकता शिविर चलाते थे। उनके साथ काम करने वाले लोगों का कहना है कि वह आदिवासियों को अपने स्वास्थ्य से जुड़े फैसले खुद लेने के काबिल बनाना चाहते थे।

पुलिस का क्या पक्ष है?

दक्षिण-पश्चिमी रेंज के IGP अखिलेश्वर सिंह के अनुसार, यह गिरफ्तारियां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई हैं। पुलिस का दावा है कि डॉ. सेकेरा के खिलाफ चार-पांच मामले लंबित हैं। उन पर क्षेत्र के लोगों को राज्य सरकार के खिलाफ भड़काने का भी आरोप है। इसके अलावा, दो आदिवासी महिलाओं ने भी उनके खिलाफ शिकायत दी है। हालांकि, पुलिस के आरोपों पर अभी कोर्ट का कोई फैसला नहीं आया है। 

 

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खनन विरोधी आंदोलन से क्या है कनेक्शन?

पुलिस का कहना है कि यह पूरा मामला अप्रैल महीने का है। रायगड़ा जिले में 'सिजिमाली बॉक्साइट भंडार' तक सड़क बनाने के काम को लेकर आदिवासियों और पुलिस के बीच एक हिंसक झड़प हो गई थी। इस घटना में दोनों पक्षों को चोटें आई थीं। हालांकि शुरुआती FIR में डॉक्टर सेकेरा का नाम नहीं था। पुलिस का दावा है कि बाद की जांच में उनकी भागीदारी सामने आई। पुलिस का कहना है कि वह पहले भी इलाके में बॉक्साइट खनन का लगातार विरोध कर रहे थे।

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