फिर आर्थिक संकट में फंसी हिमाचल सरकार, क्या CM सुक्खू की मदद करेगी BJP?
हिमाचल प्रदेश की सरकार एक बार फिर आर्थिक संकट में फंस चुकी है। केंद्र सरकार ने आरडीजी बंद करने का फैसला लिया है, जिसको लेकर राज्य में सियासी बवाल मचा हुआ है।

सर्वदलीय बैठक में सीएम सुक्खू और पूर्व सीएम जयराम ठाकुर, Photo Credit: @SukhuSukhvinder
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार एक बार फिर से संकट में फंसती हुई नजर आ रही है। इस बार केंद्र सरकार से मिलने वाली रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट (आरडीजी) के बंद होने से प्रदेश में सियासी बवाल मचा हुआ है। केंद्र सरकार ने हिमाचल समेत 17 राज्यों की ग्रांट बंद की है। हिमाचल प्रदेश के बजट में आरजीडी फंड से 13 प्रतिशत ग्रांट मिलती थी जो अब बंद हो गई है। इसके चलते एक बार फिर राज्य पर आर्थिक संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस बीच सीएम ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता कर इस मुद्दे पर चर्चा भी की। इस बैठक में बीजेपी नेता जयराम ठाकुर भी मौजूद रहे।
आर्थिक संकट तो हिमाचल प्रदेश की सराकर पर पहले भी आया था लेकिन मौजूदा समय में सीएम एक्टिव नजर आ रहे हैं। एक तरफ वह केंद्र की बीजेपी सरकार पर आरडीजी बंद करने का आरोप लगा रहे हैं और राज्य में विपक्ष पर वार कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ दिल्ली में कांग्रेस के बड़े नेताओं से मुलाकात कर इस संकट से निपटने का प्लान बना रहे हैं। आरडीजी ग्रांट बंद होने से हिमाचल को सालाना केंद्र से मिवने वाले 8 से 10 हजार करोड़ की ग्रांट कम हो जाएगी। ऐसे में सरकार के सामने अब एक बड़ी चुनौती खड़ी है।
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कैसे मिलती थी यह ग्रांट?
16वें वित्त आयोग ने आरडीजी को खत्म कर दिया है। आयोग का कहना है कि राज्य को अलग-अलग सब्सिडी खत्म करनी चाहिए, कैश ट्रांस्फर खत्म करके टैक्स एफिशिएंसी बढ़ाए और फिस्कल डिस्पिलन लाया जाए। 15वें फाइनेंस कमीशन में हिमाचल के लिए कहा गया था कि 2021 से 2026 तक हिमाचल को 90 हजार करोड़ रुपए विभिन्न स्रोतों से आएंगे। साथ ही राज्य का खर्च 1.70 लाख करोड़ होगा। कुल 80 हजार करोड़ रुपए का घाटा होगा और उस घाटे को पूरा करने के लिए 35 हजार करोड़ रुपए टैक्स डिवोल्यूशन से मिलेगा, बाकी का गैप पूरा करने के लिए 37199 करोड़ रुपए की आरडीजी दी जाएगी। इससे पहले बीजेपी की सरकार को 54,256 करोड़ आरडीजी के रूप में मिले थे। वर्तमान कांग्रेस सरकार को तीन साल में 17 हजार करोड़ रुपये मिले।
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पी. चितंबरम से मिले सीएम सु्क्खू
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आरडीजी बंद होने के बाद दिल्ली का दौरा किया और इस दौरान उन्होंने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चितंबरम से मुलाकात कर राज्य को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के प्लान पर बात की। इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सीएम ने लिखा, 'कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री श्री पी. चिदंबरम जी से मुलाकात की और वित्तीय चुनौतियों पर गहन चर्चा की। इस अवसर पर चिदंबरम जी के अनुभव एवं मार्गदर्शन से वित्तीय संकट समाधान के लिए महत्वपूर्ण और मूल्यवान सुझाव प्राप्त हुए, आगे की रणनीति तय करने में वे सहायक साबित होंगे।'
OPS पर क्या बोले सीएम?
दिल्ली में पार्टी के सीनियर नेताओं से मिलने के बाद सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल की ग्रांट बंद की है। उन्होंने आंकड़ों के साथ पिछली सरकारों को मिली ग्रांट और उनकी सरकार को मिली ग्रांट में अंतर बताया। उन्होंने कहा, 'मैंने 11 दिसंबर 2022 को सीएम की शपथ ली थी। उस समय तक जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकार को 54,256 करोड़ आरडीजी के रूप में आया था। इसके साथ ही 16 हजार करोड़ जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में मिला लेकिन हमें इस साल वित्तीय वर्ष खत्म होने तक तीन सालों में सिर्फ 17 हजार करोड़ रुपये मिले।'
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सीएम ने अपने कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए कहा, ' हमने इसके बाद भी आम जनता को दुखी नहीं किया। ओपीएस अपने सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों को दी। वित्त सचिव के बयान के बाद भी ओपीएस को बंद नहीं करेंगे और अपने संसाधनों को मजबूत करेंगे और वित्तीय प्रबंधन को सुधारेंगे। आरडीजी से हमें 3 साल में 17 हजार करोड़ मिली है, फिर भी हम आगे बढ़ रहे हैं। हम अपने संसाधनों से गरीबों की कोई भी योजना बंद नहीं करेंगे। गरीबों को उसका अधिकार मिलेगा। हमने तीन सालों में अच्छे फैसलों से 3 हजार करोड़ से ज्यादा का राजस्व कमाया है।'
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आगे क्या करेंगे सीएम सुक्खू?
आरडीजी बंद होने के बाद भी हिमाचल सरकार ने ओपीएस को लागू रखने की बात कही है। इससे साफ है कि सरकार को आर्थिक संकट से निपटने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने होंगे क्योंकि सीएम ने योजनाओं में कटौती से तो मना कर दिया है। कैबिनेट बैठक में सीएम ने सभी मंत्रियों को रिसोर्स मोबेलाइजेशन पर कार्य करने और अपने-अपने विभागों में फिजूलखर्ची कम करने के भी निर्देश दिए हैं। हालांकि, इस बैठक में भी सरकार ने कई बड़े फैसले लिए। 13 फरवरी को सीएम ने इस संकट से निपटने के लिए सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें जयराम ठाकुर समेत पक्ष विपक्ष के तमाम नेता मौजूद रहे।
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आर्थिक संकट से निकलने के लिए सरकार ने कोई ठोस नीति अब तक जनता के सामने नहीं रखी है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि आरडीजी को लेकर सरकार कोर्ट जाने का सोच रही है और इसलिए सीएम पी. चितंबरम से मिलने गए थे। उन्होंने कहा कि सीएम को केंद्र से मदद मांगनी चाहिए। वहीं, सीएम ने जयराम ठाकुर और अन्य बीजेपी नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें अपने नेताओं से बात कर हिमाचल को संकट से निकालना चाहिए।
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