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20 रुपये महंगी दी थी सिगरेट, दुकानदार और कंपनी पर लग गया 10 लाख का जुर्माना

अलीगढ़ में सिगरेट के पैकेट पर MRP से 20 रुपये ज्यादा वसूलना दुकानदार और कंपनी को महंगा पड़ा है, उपभोक्ता आयोग ने दोनों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सिगरेट के एक पैकेट पर एमआरपी से सिर्फ 20 रुपये ज्यादा लेना दुकानदार और सिगरेट बनाने वाली कंपनी को बहुत भारी पड़ गया है। डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दुकानदार और कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। यह जुर्माना 'अनुचित व्यापार व्यवहार' के लिए लगाया गया है और इस पूरी राशि को सरकारी 'कंज्यूमर वेलफेयर फंड' में जमा करने का आदेश दिया गया है।

 

यह मामला 29 जनवरी, 2026 का है। अलीगढ़ में एक ग्राहक ने 'क्लासिक' ब्रांड की सिगरेट का एक पैकेट खरीदा था। पैकेट पर एमआरपी 340 रुपये की थी लेकिन दुकानदार ने ग्राहक से 360 रुपये वसूल लिए। ग्राहक ने तुरंत इस अवैध वसूली का विरोध भी किया था लेकिन आखिर में उसने ऑनलाइन भुगतान करके सिगरेट का पैकेट ले लिया। इसके बाद ग्राहक ने अलीगढ़ के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में दुकानदार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। ग्राहक का कहना था कि दुकानदार ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए एमआरपी से ज्यादा पैसे लिए जो कि उपभोक्ता कानून के खिलाफ है।

 

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ग्राहक को भी मिलेंगे 10 हजार

इस मामले की सुनवाई डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की बेंच ने की। इस पूरे कानूनी मामले के दौरान दुकानदार आयोग के सामने अपना पक्ष रखने के लिए एक बार भी नहीं आया, जिस कारण आयोग ने अपनी कार्रवाई को 'एकतरफा' यानी 'एक्स पार्टी' के तौर पर आगे बढ़ाया। आयोग ने 15 जून को अपना आखिरी फैसला सुनाते हुए दुकानदार और सिगरेट बनाने वाली कंपनी को दोषी करार दिया। यह फैसला कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 की धारा 39(1) के तहत लिया गया है।

 

दोषी दुकानदार और सिगरेट बनाने वाली कंपनी को मिलकर 10 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। यह रकम सरकार के 'कंज्यूमर वेलफेयर फंड' में जमा की जाएगी ताकि इसे ग्राहकों के हित में इस्तेमाल किया जा सके। इसके अलावा, दुकानदार को आदेश दिया गया है कि वह ग्राहक से लिए गए 20 रुपये की अतिरिक्त राशि 18% सालाना ब्याज के साथ वापस करे। साथ ही ग्राहक को जो मानसिक परेशानी हुई और इस केस को लड़ने में जो खर्चा आया उसके लिए दुकानदार को 5,000 रुपये और 5,000 रुपये यानी पूरे 10,000 रुपये का भुगतान ग्राहक को अलग से करना होगा।

 

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कंपनी की सफाई

सिगरेट बनाने वाली कंपनी ने इस मामले से बचने के लिए अपना तर्क दिया कि उन्होंने यह सिगरेट सीधे ग्राहक को नहीं बेची है इसलिए वह इस गलती के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। आयोग ने कंपनी के इस तर्क को पूरी तरह से नकार दिया। आयोग ने साफ शब्दों में कहा कि कंपनी अपने सामान को बेचने वाले विक्रेताओं या दुकानदारों की गलतियों के लिए अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। आयोग का मानना है कि कंपनी को अपने विक्रेताओं पर नजर रखनी चाहिए ताकि बाजार में एमआरपी से ऊपर दाम वसूलने जैसी गलत हरकतें न हो सकें और ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

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