बिहार की राजनीति में एक बार फिर जन सरोकारों के मुद्दों को लेकर सियासी तापमान बढ़ने वाला है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और गरीबों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ 17 जून को राज्यव्यापी धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि RJD जनता के ज्वलंत सवालों को लेकर बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर व्यापक धरना आयोजित करेगा।
उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव और प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के निर्देश पर आयोजित किया जा रहा है। धरना में पार्टी के सांसद, विधायक, विधान पार्षद, वरिष्ठ नेता, जिला पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होंगे। साथ ही आम जनता की भी व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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क्यों सड़क पर उतर रही है RJD?
एजाज अहमद ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में वित्तीय अनियमितताओं और संगठित भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर और वित्तीय घोटालों से जुड़े मामलों में बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई कर केवल दिखावा किया जा रहा है।
RJD प्रवक्ता ने कहा कि डबल इंजन सरकार के शासन में महंगाई बेलगाम हो चुकी है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम लोगों की कमर टूट गई है। परिवहन लागत बढ़ने से दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी महंगी हो रही हैं। उन्होंने बिहार में पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए जा रहे वैट और सरचार्ज को भी जनता के साथ अन्याय बताया।
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महिलाओं की सुरक्षा बड़ा आदमी
कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए एजाज ने कहा कि राज्य में अपराध, लूट, महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन सरकार इन्हें रोकने में विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों की रफ्तार भी थम गई है और क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही।RJD ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनहित के मुद्दों पर संघर्ष का दूसरा चरण है। पार्टी का कहना है कि जनता की समस्याओं को लेकर उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए सड़क से सदन तक आवाज उठाई जाती रहेगी।