चंडीगढ़-दिल्ली रूट पर रोजना कई बसें चलती हैं। इन बसों में चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (CTU) की भी कई बसें होती हैं जिन्हें सस्ते और आरामदायक सफर के लिए लोग चुनते हैं। इन्हीं बसों को चलाने में असुरक्षित तरीकों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। इनमें एक प्राइवेट ढाबे पर अवैध रूप से रुकना शामिल है। इसके अलावा बस कर्मचारियों पर आरोप है कि वे बिना विभाग की मंजूरी के पार्सल लेकर जाते हैं। इस मामले में इस रूट से रोजना सफर करने वाले एक यात्री ने औपचारिक तौर पर शिकायत दर्ज करवा दी है।
व्यक्ति की ओर से दी गई शिकायत में यह बात सामने आई है कि CTU बसें नियमित रूप से एक प्राइवेट ढाबे पर रुकती हैं, जिसकी पहचान 'मयूर ढाबा' के रूप में हुई है। हालांकि, प्रशासन की ओर से साफ आदेश दिया गया है कि बसें सिर्फ हरियाणा टूरिज्म की ओर से चलाए जा रही निर्धारित जगहों पर ही रूकेंगी। बावजूद इसके बस कर्मचारी बसों को प्राइवेट ढाबे पर ले जाकर रोकते हैं।
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CTU के आदेशों का उल्लंघन
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि ड्राइवर अनधिकृत पार्सल स्वीकार करते हैं। ऐसा करना साल 2019 और 2021 में जारी CTU के आदेशों का सीधे तौर पर उल्लंघन है। विभाग की ओर से जारी इन आदेशों में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि ऐसे तरीकों से अवैध या खतरनाक सामग्री ले जाने का जोखिम होता। इसलिए इस तरह से पार्सल स्वीकार करने को लेकर मना किया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा को खतरा
चंड़ीगढ़ से दिल्ली का सफर आम तौर पर 6-7 घंटे का सफर है। इस सफर के दौरान बीच में बस को चाय-पानी और यात्रियों को आराम देने के लिए किसी ढाबे पर रोका जाता है। इस संबंध में CTU के आदेश है कि बसों को निर्धारित जगहों पर ही रोका जाना चाहिए, जिन्हें हरियाणा टूरिज्म की ओर से चलाया जा रहा है। हालांकि, ड्राइवर इन आदेशों को नजरअंदाज करते हुए प्राइवेट ढाबों पर बसों को रोकते हैं।
सुरक्षा के लिहाज से इन जगहों को चिंताजनक माना जाता है। इन जगहों पर पार्किंग की उचित व्यवस्था ना होगा, खाने की खराब क्वालिटी और मंहगी दरों पर सामान बेचना जैसी शिकायतें आम हैं। इसके साथ ही ट्रैफिक कंट्रोल की भी उचित व्यवस्था नहीं है जिससे यात्रियों की सुरक्षा को भी खतरा है।
प्राइवेट ढाबों की खराब स्थिति
यात्रियों ने कथित तौर पर ढाबे पर मिलने वाले अस्वच्छ और महंगे खाने के बारे में बार-बार शिकायतें की हैं। इस रूट से सफर के दौरान बीच में बस सिर्फ एक जगह पर ही रुकती है। यहां यात्रियों को खाना खाने से लेकर, चाय-पानी करना होता है। हालांकि, जिन प्राइवेट ढाबों पर बसें रोकी जाती हैं उनमें खाने पीने और बैठने की उचित व्यवस्था नहीं होती। वॉशरूम भी साफ नहीं होते जिससे यात्रियों खासकर महिला यात्रियों को दिक्कत होती है। इसके साथ ही इन ढाबों पर बासी खाने की शिकायतें भी मिलती हैं। खाने के कुछ ही विकल्प हैं ऐसे में दुकान के मालिक अपनी मनमर्जी से कीमतें वसूलते हैं।
शिकायत में भी इस बात को बताया गया है कि बस ड्राइवर और कंडक्टर का कुछ चुनिंदा प्राइवेट ढाबों पर बस का रोकना दोनों के बीच समझौते को दिखाया गया है। ढाबे पर बस रोकने और पार्सल ले जाने के बदले ड्राइवर को कुछ लाभ मिलने की बात की ओर इशारा शिकायत में किया गया है। शिकायत में इस समस्या को लेकर जल्द ही उचित कदम उठाने के लिए कहा गया है।
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कर्मचारियों की कमी और पक्षपात के आरोप
इसके साथ ही परिवहन निदेशक को सौंपी गई एक अन्य शिकायत में कहा गया है कि ड्राइवरों को ऑपरेशनल कामों के बजाय अन्य कामों में लगाया गया है जिससे स्टाफ की कमी हो रही है। ड्राइवरों और कंडक्टरों की कमी के कारण ऑपरेशनल दबाव भी बढ़ रहा है जिससे मौजूदा कर्मचारियों पर दबाव बढ़ रहा है और उन्हें ओवरटाइम करना पड़ रहा है। इसके साथ ही पक्षपात, भाई-भतीजावाद और सिफारिश के आधार पर तैनाती के आरोप भी लगाए गए हैं।
विभाग ने साधी चुप्पी
इस मामले में खबरगांव की ओर से CTU के अधिकारियों को संपर्क करने के बावजूद अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए। CTU के CCBSS यशजीत गुप्ता की ओर से फोन का जवाब नहीं दिया गया और जीएम सत्येंद्र दहिया को दो बार संपर्क करने के बावजूद उन्होंने सवालों का जवाब नहीं दिया।