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'भारत माता शास्त्रों में नहीं, ये RSS की कल्पना', अविमुक्तेश्वरानंद का बयान

भारत माता काल्पनिक है। शास्त्रों में कोई उल्लेख नहीं है। यह सिर्फ संघ की कल्पना है। यह बयान दिया है ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने। अयोध्या पहुंचे शंकराचार्य ने मूर्ति चोरी और चंदा चोरी का भी जिक्र किया।

Swami Avimukteshwaranand Saraswati

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। (Photo Credit: PTI)

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अयोध्या पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भारत माता को काल्पनिक बताया। उन्होंने तर्क दिया कि भारत माता का किसी भी शास्त्र में जिक्र नहीं है। अब उनके बयान ने सियासी गलियारों में एक नहीं बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि भारत माता केवल संघ की कल्पना है। आज धार्मिकों की मेधा पर अधार्मिकों का कब्जा हो चुका है। चंदा और चढ़ावा चोरी की बात हो रही, लेकिन यहां तो मूर्ति चोरी भी हो चुकी है।

 

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संतों के स्थान पर भारत माता की तस्वीर होने पर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने अयोध्या के एक संत का जिक्र किया और कहा, 'उनकी बैठक के पीछे दीवार पर बहुत बड़ा एक काल्पनिक भारत माता का चित्र लगा है। राम जी का कोने में छोटा सा चित्र लगा है। आज अयोध्या में राम जी छोटे हो चुके हैं और कोने में जा चुके हैं। मुख्य जगह पर वो भारत माता आ चुकी है, जिसका किसी शास्त्र में कोई वर्णन नहीं है। केवल संघ की कल्पना है।'

 

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'1947 से पहले तिरंगा नाम का हमारा कोई झंडा नहीं था'

उन्होंने आगे कहा, 'भारत माता नाम से न तो हमारे शास्त्र में कोई देवी है, न कोई देवता है। नहीं ही इस तरह का कोई स्वरूप का वर्णन है।' भारत माता के तिरंगा लेने पर उन्होंने कहा, 'तिरंगा को आज से 78 साल पहले 1947 में स्वीकार किया गया। उससे पहले तिरंगा नाम का हमारा कोई झंडा ही नहीं था। ऐसी परिस्थितियों में धार्मिकों की मेधा पर अधार्मिकों लोगों का कब्जा हो चुका है, केवल जमीन पर ही नहीं... आपकी बुद्धि, प्रतिभा और आपके चिंतन पर भी ये लोग कब्जा कर रहे हैं। इस बारे में सजग होने की आवश्यकता है।' 

 

 

 

 

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आरएसएस पर भी साधा निशाना

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'जो आरएसएस अपने कार्यालय में रामजी का चित्र नहीं लगा सकता, वह आरएसएस यहां पर रामजी का मुख्य कर्ता धर्ता बनकर बैठ गया है। यह बेहद आपत्तिजनक है।' उन्होंने आगे कहा, 'चंदा और चढ़ावा चोरी की बात की जा रही है। यहां तो भगवान की मूर्ति चोरी भी हो चुकी है। 1950 से 1992 तक जो रामलला वहां पर थे, वह मूर्ति कहां है? 1992 के बाद वह मूर्ति चोरी हो गई।'


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