आजमगढ़ के मुबारकपुर क्षेत्र में 1999 में शिया और सुन्नी समुदाय के बीच दंगा हुआ था। इस दंगे में अली अकबर की हत्या कर दी गई थी। अली अकबर के मर्डर के मामले में पिछले 27 साल से मुकदमा चल रहा था। इस मुकदमे पर शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाया है। इस मामले में कुल 12 आरोपीयों को दोषी ठहराया गया है। कोर्ट में 17 फरवरी को आरोपियों को सजा सुनाई जाएगी।
अली अकबर के मर्डर के आरोपियों में उसके खुद के 3 भाई भी शामिल हैं। शिया और सुन्नी दंगा 27 अप्रैल 1999 में हुआ था। जब शिया समुदाय के लोग मोहर्रम का जुलुस निकाल रहे थे। इसी जुलुस में अली अकबर को लोगों के झुंड ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतारा। जिसके बाद यह मामला कोर्ट में गया था।
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शिया - सुन्नी विवाद
मुबारकपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में शिया और सुन्नी विवाद शुरू हुआ था। यह विवाद महज 10 फीट के जमीन के लिए शुरू हुआ था। इसके बाद मोहर्रम के दिनों में 27 अप्रैल 1999 को शिया समुदाय के लोग जुलुस निकाल रहे थे। इस जुलुस को शिया समुदाय ने रोका जिसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हो गई। दोनों तरफ से लोगों ने पथराव किए। साथ ही कुछ लोगों ने अली अखबर को पीटाई की। इस दंगों को कुछ देर बाद पुलिस ने रोकने की कोशिश की थी।
अली अकबर इस दंगे का हिस्सा नहीं थे। वह ताजिया दफन करने 'पंजे शाह' गए थे, दंगे वाली जगह पर वह नहीं थे। वहीं से शाम को वह घर लोट रहे थे। इस दंगे की वजह से वह वापिस अपने घर नहीं लोट पाए। जिसके बाद अगली सुबह अली अकबर के बेटे ने अपने पिता के गुमशुदा ही रिर्पोट लिखवाई। पुलिस को जांच पड़ताल के दौरान 30 अप्रैल को अली अकबर की सिर कटी लाश एक पोखरे के पास मीली थी। पुलिस ने अपने जांच में पाया कि यह हत्या जुलुस के दंगे में की गई है।
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कोर्ट में सुनावाई
पुलिस ने इस मामले में जांच के बाद करीब 12 लोगों को इस मामले में गुनहगार घोषित किया। जिसके बाद यह मामला जिला न्यायलय गया। न्यायलय में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें जज के सामने पेश किया। जिसके बाद जिला न्यायलय के जज जयप्रकाश पांडेय ने यह फैसला सुनाया की 12 आरोपी इस हत्या के दोषी हैं।