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बिहार के रेडियो ऑपरेटर एग्जाम में सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश, 15 आरोपी गिरफ्तार

बिहार पुलिस ने रेडियो ऑपरेटर भर्ती परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया, जो मोटी रकम लेकर असली छात्रों की जगह दूसरे लोगों से परीक्षा दिलवाता था ताकि उम्मीदवार पास हो जाएं।

Bihar Radio Operator Exam

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

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बिहार पुलिस रेडियो ऑपरेटर भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। खगड़िया पुलिस ने सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ करते हुए 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस गैंग में परीक्षार्थी, सॉल्वर और उनके सहयोगी शामिल हैं। जांच में कुछ स्कूल शिक्षकों की संलिप्तता भी सामने आई है। एसपी ने बताया कि 28 जून 2026 को डीआईयू (DIU) शाखा को सूचना मिली थी कि कुछ लोग रेडियो ऑपरेटर भर्ती परीक्षा में सेटिंग कर परीक्षार्थियों को पास कराने की तैयारी कर रहे हैं। गैंग ने मोटी रकम लेकर दूसरे व्यक्ति को परीक्षार्थी की जगह परीक्षा दिलाने की योजना बनाई थी।

 

सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। एसपी ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। टीम ने 28 और 29 जून की रात शहर के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें 5 परीक्षार्थी, 4 सॉल्वर और 6 बिचौलिए शामिल हैं। आरोपियों के पास से फर्जी एडमिट कार्ड, कई लोगों के आधार कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और 1.80 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। 

 

पूछताछ में पता चला कि गैंग प्रत्येक परीक्षार्थी से 4 से 5 लाख रुपये लेता था। इसके बदले परीक्षा केंद्र पर सेटिंग कर सॉल्वर को बैठाने की गारंटी दी जाती थी। सॉल्वर असली अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते थे। इसके लिए फोटो मॉर्फिंग कर फर्जी पहचान पत्र (आईडी कार्ड) तैयार किए जाते थे।

 

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शिक्षकों की भूमिका संदिग्ध

एसपी ने बताया कि शुरुआती जांच में कुछ स्कूल शिक्षकों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आशंका है कि परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी में तैनात कुछ शिक्षकों ने गैंग की मदद की। उन्होंने सॉल्वर की पहचान होने के बावजूद उन्हें नहीं रोका। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाल रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि गैंग का नेटवर्क कहां-कहां फैला हुआ था और किन-किन परीक्षा केंद्रों पर सेटिंग की गई थी।

कैसे काम करता था गैंग?

गैंग का तरीका बेहद शातिर था। सबसे पहले बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का लालच देकर अपने जाल में फंसाया जाता था। इसके बाद 5 लाख रुपये में सौदा तय होता था, जिसमें आधी रकम पहले ही ले ली जाती थी। फिर परीक्षार्थी के एडमिट कार्ड पर सॉल्वर की फोटो लगाई जाती थी और आधार कार्ड में भी फर्जीवाड़ा किया जाता था। परीक्षा के दिन सॉल्वर असली अभ्यर्थी बनकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर परीक्षा देता था।

 

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सभी आरोपी भेजे गए जेल

गिरफ्तार सभी 15 आरोपियों के खिलाफ खगड़िया नगर थाना में मामला दर्ज किया गया है। इनके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आईटी एक्ट और परीक्षा अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। एसपी ने कहा कि किसी भी सूरत में परीक्षा में फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षकों की भूमिका की भी गहन जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर गैंग का नेटवर्क कोई नई बात नहीं है। इससे पहले सिपाही भर्ती, दरोगा बहाली और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में भी ऐसे कई गिरोह पकड़े जा चुके हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) भी लगातार ऐसे मामलों में कार्रवाई कर रही है।


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