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59 दिन में आया फैसला, पुणे रेप-मर्डर केस में 65 वर्षीय दोषी को मिली फांसी

महाराष्ट्र के पुणे में 3 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष अदालत ने 59 दिनों के भीतर 65 वर्षीय दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Meta Ai

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महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरापुर में तीन साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष अदालत ने 65 वर्षीय दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य वारदात को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' यानी दुर्लभ से दुर्लभतम कैटेगरी का अपराध मानते हुए कहा कि आरोपी की करतूत ने न केवल न्यायपालिका बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। इस मामले में घटना के महज 59 दिनों के भीतर फैसला आने को न्याय प्रक्रिया की तेज रफ्तार का उदाहरण माना जा रहा है।

 

यह वारदात 1 मई को हुई थी। अदालत ने 25 जून को आरोपी को दोषी करार दिया था और सोमवार को सजा सुनाई। जैसे ही न्यायाधीश ने फांसी की सजा का ऐलान किया अदालत में मौजूद पीड़ित बच्ची के परिजन भावुक हो गए। फैसले के बाद परिवार ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताया और कहा कि उन्हें न्याय मिला है।

 

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पीड़िता के पिता ने कहा, 'अदालत का फैसला पूरी तरह संतोषजनक है और जैसा हम शुरू से चाहते थे वैसा ही आया है। पूरे गांव और समाज की शुरुआत से यही मांग थी कि दोषी को फांसी की सजा मिले। अदालत के इस फैसले से हमें बहुत संतोष मिला है।'

 

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पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे वकील विपुल दुशिंग ने कहा, 'इस मामले में दोषी को सजा-ए-मौत देने के लिए जो भी कानूनी मानदंड जरूरी थे वे सभी पूरे हुए हैं। यह अपराध बेहद बर्बर था। आरोपी ने सिर्फ अपनी हवस मिटाने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया।'

कोर्ट ने क्या कहा?

फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश एस आर सालुंखे ने कहा कि आरोपी पहले भी गंभीर अपराधों में शामिल रहा है। अदालत के अनुसार, यह अपराध बेहद क्रूर और अमानवीय तरीके से किया गया। न्यायालय ने कहा कि मासूम बच्ची पूरी तरह असहाय थी और आरोपी ने बिना किसी उकसावे के उसकी हत्या कर दी। अदालत ने इसे ऐसा अपराध बताया, जिसने पूरे समाज की संवेदना को झकझोर दिया।

 

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जांच में सामने आया कि आरोपी बच्ची को नाश्ता खिलाने और नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर अपने साथ ले गया था। इसके बाद उसने सुनसान जगह पर वारदात को अंजाम दिया और सबूत मिटाने के लिए बच्ची की हत्या कर दी। अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई भी ऐसा तथ्य नहीं मिला जिससे सजा कम करने पर विचार किया जा सके। न्यायाधीश ने यह भी साफ किया कि आरोपी की 65 वर्ष की उम्र उसके पक्ष में राहत का आधार नहीं बन सकती। वहीं, पीड़ित बच्ची के पिता ने कहा कि शुरुआत से ही पूरे गांव की मांग थी कि दोषी को फांसी मिले और अदालत के फैसले से परिवार को न्याय मिलने का संतोष है।


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