देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र कॉलेज में हॉस्टल की सुविधा ना होने के कारण कैंपस के बाहर पीजी या किराए पर कमरा लेकर रहने के लिए मजबूर हैं। यूनिवर्सिटी के आसपास बच्चों के शोषण के लिए पूरा सिस्टम बन चुका है और पीजी के नाम पर बच्चों से मनमाना किराया लिया जा रहा है। इसके बावजूद बच्चे असुरक्षित जगहों में रहने के लिए मजबूर हैं। दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे ने एक बार फिर पूरे सिस्टम की पोल खोल दी लेकिन यह हालत सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश की है। पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में भी छात्रों को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
चंडीगढ़ को ज्यादातर लोग एक आदर्श और सुंदर शहर के रूप में देखते हैं जिसे पूरे प्लान के साथ बनाया गया है। प्लान के साथ बनाए गए इस शहर में हायर एजुकेशन के कई संस्थान तो बनाए गए लेकिन इन संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चे कहां रहेंगे इसको लेकर कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई है। समय के साथ संस्थानों में छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन उसी अनुपात में हॉस्टल और आवास सुविधा नहीं बढ़ी है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि छात्रों को बाहर मंहगे हॉस्टल और पीजी लेकर रहना पड़ता है।
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कितने हॉस्टल हैं?
हॉस्टल की संख्या बच्चों की संख्या के अनुपात में होना जरूरी है लेकिन इसको लेकर कोई ठोस नियम नहीं है। चंडीगढ़ शहर में 100 से ज्यादा हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट हैं लेकिन ज्यादातर में हॉस्टल की सुविधा पर्याप्त नहीं है। ऐसे में बच्चे बाहर रहने के लिए मजबूर हैं। यह बच्चों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है।
- पंजाब यूनिवर्सिटी- पंजाब यूनिवर्सिटी शहर का सबसे बड़ा शिक्षण संस्थान है। इस संस्थान में सभी विभागों को मिलाकर कुल 16500 से ज्यादा छात्र हैं लेकिन हॉस्टल की संख्या इससे आधी भी नहीं है। पंजाब यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कैंपस में कुल 21 हॉस्टल हैं जिनमें 7600 छात्रों को रखा जाता है। यूनिवर्सिटी कैंपस के ही 9 हजार से ज्यादा छात्रों को रहने के लिए बाहर पीजी या किराए पर कमरे लेने पड़ते हैं।
- पीजीआई- पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में शहर का सबसे बड़ा संस्थान है। यहां करीब 3000 छात्र व रेजिडेंट डॉक्टर्स हैं। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 5 हॉस्टल ही हैं जिनमें कुल मिलाकर 820 छात्र रह सकते हैं। यानी 2000 से ज्यादा छात्रों के लिए आवास की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
- PEC- इंजीनियरिंग की पढ़ाई में PEC यानी पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज शहर का सबसे प्रमुख संस्थान माना जाता है। इस संस्थान में भी 3 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ाई करते हैं। इस संस्थान में ज्यादातर स्टूडेंट्स को हॉस्टल की सुविधा मिलती है और मौजूदा समय में 2,178 हॉस्टल की सीट मिल रही हैं। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से नए हॉस्टल और पुराने का विस्तार प्लान किया जा रहा है जिसके बाद 2,906 छात्रों को हॉस्टल की सुविधा मिल सकेगी।
- चंडीगढ़ के कॉलेज- पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के मुख्य कैंपस के अलावा चंडीगढ़ में इस यूनिवर्सिटी के करीब 16 कॉलेज हैं और इन कॉलेजों में एडमिशन चंडीगढ़ हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट करता है। इन कॉलेजों में छात्रों की संख्या लगभग 50,000 तक पहुंच गई है लेकिन हॉस्टल के मामले में यह बहुत पीछे है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन कॉलेजों में करीब 6000 हॉस्टल की सीटें हैं। उदाहरण के लिए श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज, चंडीगढ़ की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कॉलेज में 6000 से ज्यादा एक्टिव स्टूडेंट हैं। इस कॉलेज में कुल 300 छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा है। ऐसे में ज्यादातर छात्रों को बाहर रहना पड़ता है।
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छात्रों के पास विकल्प
चंडीगढ़ शबर में इन कॉलेजों के अलावा भी अन्य कई शिक्षण संस्थान हैं। हालांकि, इनमें छात्रों की संख्या इन कॉलेजों की तुलना में कम है। इन कॉलेजों में छात्रों की संख्या और हॉस्टल में सीटों की संख्या में बहुत ज्यादा अंतर है। ज्यादातर छात्रों को कॉलेज के बाहर पीजी या कमरा लेना पड़त है। ऐसे छात्रों को हर महीने 6 हजार रूपये से 15 हजार रुपये तक किराया देना पड़ता है। तमाम कॉलेजों में कोर्स और सीटों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन हॉस्टल की संख्या उस हिसाब से नहीं बढ़ रही है। ऐसे में छात्र लगातार परेशानी का सामना कर रहे हैं और शोषण का शिकार हो रहे हैं।