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2015 में चलीं थी गोलियां, बहबल कलां गोलीकांड में अब क्यों फंस गए सुखबीर बादल?

2015 का बहबल कलां गोलीकांड एक बार फिर चर्चा में है। AAP ने दावा किया है कि सुखबीर बादल ने अकाल तख्त के सामने पेशी के दौरान इस मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की थी। 

Shiromani Akali Dal (SAD) leader Sukhbir Singh Badal

शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल, Photo Credit: ANI

बहबल कलां गोलीकांड पंजाब के इतिहास की एक चर्चित और विवादित घटना है। यह घटना 14 अक्टूबर 2015 को पंजाब के बहबल कलां गांव में हुई थी और अब अचानक से एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इस मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी के सामने अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने बयान दर्ज करवाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने तख्त के सामने पेशी के दौरान इस मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की थी। 

 

अभी तक एसाईटी ने आधिकारिक तौर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा है लेकिन आम आदमी पार्टी के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने यह दावा किया है। उन्होंने यहां तक कहा कि सुखबीर बादल के कबूलनामे की विडियो रिकॉर्डिंग भी श्री अकाल तख्त साहिब के पास है। उनके इस बयान से एक बार फिर सुखबारी बादल फंसते नजर आ रहे हैं और विपक्ष उन पर हमलावर हो गया है। 

 

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क्या है बहबल कलां कांड?

बहबल कलां गोलीकांड पंजाब के इतिहास का एक सबसे चर्चित विवाद है। इस विवाद की शुरुआत शिरोमणि अकाली दल की सरकार के समय हुई जब लोग श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। यह प्रदर्शन बरगाड़ी बेअदबी मामले के बाद शुरू हुए थे। प्रदर्शनकारी न्याय की मांग कर रहे थे और कई जगह धरना चल रहा था।

 

इसी दौरान बहबल कलां में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया और पुलिस ने गोलीबारी कर दी। इस फायरिंग में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और कई घायल भी हो गए। इस घटना के बाद यह मामला पंजाब में कानून व्यवस्था, बेअदबी के खिलाफ सरकार के रुख और राजनीति मुद्दा बन गया। इसके बाद एसआईटी गठित कर इस मामले की जांच की गई और अब इसी कड़ी में यह दावा किया गया है कि सुखबीर बादल ने खुद को दोषी माना था। गौरतलब है कि उस समय शिरोमणि अकाली दल की ही सरकार थी। 

AAP के आरोपों पर क्या बोले बादल?

AAP ने अब सुखबीर बादल पर कबूलनामे के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर सुखबीर बादल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ जितने चाहे मामले दर्ज कर लिए जाएं, वह न तो जेल जाने से डरते हैं और न ही राजनीतिक दबाव के आगे झुकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के साथ मिलकर उन्हें एक झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है।


उन्होंने कहा कि पूर्व जत्थेदार उनके शब्दों और भावनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं, जो मर्यादा के खिलाफ है। ज्ञानी रघवीर सिंह अब आप के सक्रिय सदस्य की तरह व्यवहार कर रहे हैं। सुखबीर बादल आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम पर उनके खिलाफ साजिश करने के आरोप लगा रहे हैं। 

कांग्रेस ने भी बोला हमला

2017 में पंजाब में कांग्रेस की जीत में बेअदबी के मुद्दे ने बड़ा अहम रोल निभाया था। इस कांड के बाद ही शिरोमणि अकाली दल की सरकार के खिलाफ माहौल बनना शुरू हो गया था। अब जब सुखबीर बादल पर आरोप लग रहे हैं तो कांग्रेस प्रधान ने भी उन्हें घेरा है। राजा वडिंग ने इस कांड का ब्यौरा देते हुए कहा कि आत्मरक्षा का झूठा बचाव खड़ा करके निर्दोष और निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाई गई थीं। राजा वडिंग ने कहा कि उस समय सुखबीर सिंह बादल पंजाब के गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री थे। उन्होंने दावा किया कि इन सभी अपराधों को खुद सुखबीर सिंह बादल ने अकाल तख्त के सामने पेश होकर और प्रायश्चित के तौर पर अपनी गलती मानकर स्वीकार किया था, लेकिन पीड़ितों को आज तक न्याय नहीं मिला है।

 

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बेअदबी मामलों के कारण कमजोर हुए सुखबीर बादल

पंजाब में शिरोमणि अकाली दल लंबे समय से सिखों की पार्टी के रूप में अपनी पहचान बनाकर राजनीति करती रही है। 2012 में पार्टी ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई और प्रकाश सिंह बादल सीएम बने, लेकिन इस कार्यकाल में पार्टी पर गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों पर कार्रवाई ना करने के आरोप लगे। 

 

2015 में बरगाड़ी बेअदबी मामले ने पूरे पंजाब को हिला कर रख दिया था। सरकार कार्रवाई करने में विफल रही थी। इसके बाद बहबल कलां में फायरिंग हुई जिसने सुखबीर बादल को राजनीतिक रूप से बहुत कमजोर कर दिया। 2017 में पार्टी की चुनाव में करारी हार हुई। दिसंबर 2023 में सुखबीर बादल ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें दुख है कि बेअदबी की घटनाएं उनकी सरकार के समय हुईं और उन्होंने सिख समुदाय से माफी मांगी। अब जब सुखबीर बादल फिर से राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं ऐसे में AAP ने इस मुद्दे को उठाकर उन्हें फिर से मुश्किल में डाल दिया है।

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