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पंजाब के 50 वार्डों में फिर होंगे चुनाव, सुप्रीम कोर्ट का आदेश, वजह समझिए

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 वार्डों में फिर से स्थानीय चुनाव करवाने का आदेश दिया है। इसमें पटियाला के 28 वार्डों के अलावा बाघापुराना के सभी 15 वार्ड और धर्मकोट के 7 वार्ड शामिल हैं।

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट, Photo Credit- PTI

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पंजाब में स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने पटियाला नगर निगम के 28 और मोगा जिले के बाघापुराना और धर्मकोट नगर निकायों के 22 वार्डों में दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया है। इस तरह कुल 50 वार्डों में अब फिर से चुनाव होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इन चुनावों की पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा है। कोर्ट ने यह आदेश 2024 में हुए स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान नामांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने के आरोपों की जांच के बाद दिया है।

 

इस मामले में विपक्षी उम्मीदवारों की ओर से आरोप लगाए गए थे कि चुनाव के दौरान उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका गया। कुछ उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र छीनने, फाड़ने और उनके साथ मारपीट किए जाने जैसे आरोप भी लगाए थे। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों और कुछ पुलिसकर्मियों ने चुनाव प्रक्रिया में बाधा डाली। चुनाव के समय भी इस मामले में जमकर हंगामा हुआ था। 

 

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जांच के लिए बनाई गई थी कमेटी

चुनाव के बाद उम्मीदवारों ने कोर्ट का रुख किया और मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई। इस आयोग ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की जांच की। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया और उसके रिपोर्ट के आधार पर संबंधित 50 वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया। पटियाला के 28 वार्डों के अलावा बाघापुराना के सभी 15 वार्ड और धर्मकोट के 7 वार्ड इसमें शामिल हैं।

कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इन वार्डों में दोबारा चुनाव की पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह के अंदर पूरी की जाए। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए न्यायिक निगरानी की व्यवस्था भी रखी है। कोर्ट ने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोबारा होने वाले चुनाव में उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने और चुनाव लड़ने का उचित मौका मिले। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश इन मामलों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे भविष्य के उपचुनावों के लिए सामान्य मिसाल नहीं माना जाएगा।

 

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आखिर क्या हुआ था?

दरअसल, पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। विपक्षी उम्मीदवारों ने चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप लगाते हुए पहले कोर्ट का रुख किया और बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। याचिकाओं में हिंसा, नामांकन पत्र दाखिल करने से रोकने और चुनाव प्रक्रिया में दबाव बनाए जाने जैसे आरोप लगाए गए थे। अब इसी मामले में कोर्ट ने फिर से चुनाव करवाने के आदेश दिए हैं।


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