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तेजस्वी बना रहे नई रणनीति, क्या पार्टी में बदलाव की है तैयारी?

हाल ही में तेजस्वी यादव विदेश यात्रा पर गए थे जिसके बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी। अब इसे चुनौती के रूप में लेते हुए वह कुछ बदलावों का फैसला ले सकते हैं।

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तेजस्वी यादव । Photo Credit: PTI

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संजय सिंह, पटना: चुनाव में पराजय के बाद विदेश यात्रा पर गए प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की घर के बाहर और पार्टी के भीतर जमकर आलोचना हुई। सत्ता पक्ष के लोगों ने भी जमकर उपहास किया। अपनी आलोचना को तेजस्वी ने चुनौती के रूप में लिया। पार्टी को सशक्त बनाने के लिए उन्होंने पहले दिन सांसदों और राज्यसभा के सदस्यों के साथ बैठक की। बजट सत्र में पूछे जाने वाले सवालों पर भी गहन मंथन किया। 

 

बैठक में तेजस्वी यादव के करीबी रहे राज्यसभा सदस्य संजय यादव थोड़ी दूर दिखे। दूसरे दिन की बैठक में विधायक, चुनाव हारे प्रत्याशी और पार्टी के प्रमुख 77 नेताओं को बुलाया गया। इन लोगों से ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट ली गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 25 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की जाएगी। संभावना है कि इस बैठक में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया जाय।

 

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लालू को साइड करने की तैयारी 

मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की सियासत में खूब दांव पेंच चला गया। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के आमंत्रण पर राष्ट्रीय जनशक्ति जनता दल के मकर संक्रांति भोज के कार्यक्रम में शामिल हुए। इससे तेजप्रताप की राजनीतिक हैसियत बढ़ी। तेजप्रताप यादव ने अपने छोटे भाई तेजस्वी को आरजेडी का विलय जनशक्ति जनता दल में करने की सलाह दे डाली। तेजप्रताप ने यहां तक कहा कि लालू यादव की असली पार्टी जनशक्ति जनता दल ही है। 

 

लालू के उस भोज में शामिल होने से तेजस्वी और आरजेडी की भारी किरकिरी हुई। अब तेजस्वी यादव अन्य नेताओं की सलाह पर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर लालू यादव को पार्टी के दायित्व से मुक्त कर सकते हैं। 25 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में संभव है कि तेजस्वी यादव को आरजेडी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया जाय। तेजस्वी यादव अपने अन्य विश्वास पात्रों को भी संगठन में मुख्य जिम्मेवारी देने के मूड में हैं। 

जनता के बीच जाने की तैयारी 

प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने विदेश यात्रा से लौटने के बाद यह कहा था कि वह 100 दिनों तक सरकार के कामकाज को देखेंगे और समझेंगे, फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। दो दिनों की गहन समीक्षा बैठक के बाद पार्टी नेताओं से मिले फीडबैक के आधार पर तेजस्वी ने अपना इरादा बदला है। बजट सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी भी की गई है। सांसदों और राज्यसभा सदस्यों को यह जिम्मेवारी दी गई है कि बिहार की हकमारी के मुद्दे को वह प्रमुखता के साथ सदन में उठाएं। 

 

इसी तरह विधानसभा में भी सरकार को घेरने की तैयारी की गई है। रोजगार, मंहगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे को सदन में गंभीरता पूर्वक उठाने का निर्णय लिया गया। बैठक में मौजूद नेताओं का कहना था कि बिहार में लगातार अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। बढ़ते अपराध को लेकर सरकार को घेरना जरूरी है। जब तक सदन से सड़क तक इस मुद्दे को लेकर संघर्ष नहीं करेंगे, तब तक जनता के बीच हमारी गहरी पैठ नहीं बन पाएगी। संगठन को धारदार बनाने की जरूरत है। सरकार की कमियों को घर-घर लाकर बताना पड़ेगा, तभी हम जनता का भरोसा जीत पाएंगे।

बड़े विरोधियों पर गिर सकती है गाज 

बैठक में कुछ नेताओं का कहना था कि पार्टी की बेवजह आलोचना के कारण पार्टी की छवि को नुकसान होता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी और तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य लगातार पार्टी की नीतियों और तेजस्वी के कार्यशैली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। दोनों की नाराजगी के अलग-अलग कारण हैं। रोहिणी आचार्य के निशाने पर तेजस्वी यादव के दो चार करीबी मित्र हैं। तेजस्वी यादव ने इस संकट से निपटने के लिए अपना ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है।

 

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पार्टी सूत्रों का कहना है कि परिवार में कलह कम करने के लिए उन्होंने राज्यसभा सदस्य संजय यादव से दूरी बनानी शुरू कर दी है। सांसद और राज्यसभा सदस्यों की बैठक में मीसा भारती तेजस्वी के नजदीक बैठी थी, जबकि संजय यादव दूर रहे। इधर प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने प्रतिपक्ष के नेता को चुनाव की समीक्षा का प्रतिवेदन सौंप दिया है। प्रतिवेदन के आधार पर पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल नेताओं पर गाज गिरेगी। प्रतिवेदन के आधार पर ही पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी।

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