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'मैं BJP को दोष नहीं दे रही हूं', बारुईपुर कांड पर ऐसा क्यों बोलीं ममता बनर्जी?

TMC चीफ ममता बनर्जी ने बारुईपुर रेप और मर्डर केस को लेकर एक प्रोटेस्ट मार्च निकाला। मार्च के दौरान, उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए, साथ ही अपने बयान में कहा कि वह BJP को दोष नहीं दे रही हूं।

Mamata Banerjee Baruipur protest march

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, Photo Credit: ANI

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पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना बारुईपुर में 2 वर्षीय बच्ची के गैंगरेप और हत्या के मामले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस घटना के विरोध में निकाली गई तृणमूल कांग्रेस (TMC) की रैली के दौरान हुए विवाद के बाद पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बावजूद उनकी पार्टी की रैली को शांतिपूर्ण ढंग से नहीं होने दिया गया। उन्होंने कहा कि मैं BJP को दोष नहीं दे रही हूं, मैं पुलिस और प्रशासन को जिम्मेदार मानती हूं।

 

TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने बारुईपुर रेप-मर्डर केस को लेकर निकाले गए विरोध मार्च में कहा, 'मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि राम के नाम को बदनाम मत करो। जब हाई कोर्ट ने रैली की इजाजत दे दी थी तो फिर पुलिस ने ऐसा क्यों किया? मैं BJP को दोष नहीं दे रही हूं, मैं पुलिस और प्रशासन को जिम्मेदार मानती हूं। उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी कि रैली शांतिपूर्ण तरीके से होने देते। उन्होंने क्या किया? BJP के लोगों को टेंट लगाने, मंच बनाने और माइक लगाने की इजाजत दे दी। वहीं हमारा हैंड माइक छीन लिया, जबकि हाई कोर्ट ने साफ तौर पर हैंड माइक की अनुमति दी थी।

 

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महिला कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट के आरोप

उन्होंने यह भी दावा किया कि रैली में शामिल महिला कार्यकर्ताओं के साथ भी मारपीट की गई। ममता ने कहा कि पुलिस निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम करती दिखी। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, 'हमारे कार्यकर्ताओं की पिटाई की गई। कई लोग इतने घायल हैं कि अस्पताल भी नहीं जा पा रहे। महिलाओं को पीटा गया, लड़कों-लड़कियों को मारा गया, यहां तक कि बुजुर्गों को भी नहीं छोड़ा गया। मुझे खबर मिली कि हमारी आईटी सेल की चेयरपर्सन को वहां से घसीटकर बाहर निकाला गया और उनके साथ मारपीट की गई। इसलिए मैं खुद मौके पर उन्हें बचाने के लिए गई।'

क्या है पूरा मामला?

बारुईपुर की घटना के विरोध में तृणमूल यूथ कांग्रेस ने विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई थी। शुरुआत में कोलकाता पुलिस ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया था। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस के फैसले को रद्द करते हुए कुछ शर्तों के साथ रैली निकालने की इजाजत दी। अदालत ने रैली के लिए निर्धारित मार्ग, समय सीमा, अधिकतम एक हजार लोगों की भागीदारी, लाउडस्पीकर पर रोक और सड़क का एक हिस्सा यातायात के लिए खुला रखने जैसी शर्तें तय की थीं।

 

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बारुईपुर में 12 वर्षीय बच्ची का शव 5 जुलाई को एक तालाब से बरामद हुआ था। पुलिस के अनुसार, बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया, फिर उसकी हत्या कर शव को बोरे में भरकर तालाब में फेंक दिया गया। इस घटना से पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया। मामले में बुधवार को नया मोड़ तब आया, जब मुख्य आरोपियों में से एक की क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। इस एनकाउंटर को लेकर भी विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, बारुईपुर कांड अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।


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