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अभिषेक बनर्जी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, दफ्तर गिराने पर लगी रोक

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कंपनी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कंपनी का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध है। दफ्तर का मलिकाना हक उसके पास है।

TMC MP Abhishek Banerjee

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी। (Photo Credit: PTI)

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तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके दफ्तर पर चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अभिषेक बनर्जी की कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स ने यह याचिका दाखिल की थी। याचिका में अधिकारियों पर अवैध रूप से संपत्ति को ढहाने का आरोप लगाया। बता दें कि शनिवार को पुलिस और केंद्रीय बलों की मौजूदगी में दक्षिण 24 परगना के अमताला में स्थित अभिषेक बनर्जी के दफ्तर को ढहाया गया।  

 

तृणमूल कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अयान बनर्जी और वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने लीप्स एंड बाउंड्स का पक्ष रखा। किशोर दत्ता ने कोर्ट से ध्वस्तीकरण को रोकने और अपने मुवक्किल के लिए अंतरिम राहत की मांग की। उन्होंने कहा कि सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया गया। 

 

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बंगाल सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल (AG) सुरोजित नाथ मित्रा ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि साफ नीयत से याचिका दायर नहीं की गई है और यह साबित करने में विफल रही है कि निर्माण अधिकृत था। विध्वंस कार्रवाई 30 जून के नोटिस के बाद हुआ। इसे याचिकाकर्ता को विधिवत रूप से तामील कराया गया था।

अगली सुनवाई तक रोक

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने कहा कि अगली सुनवाई होने तक या जुलाई 2026 के अंत तक... जो भी पहले हो, संपत्ति की प्रकृति, स्वरूप और कब्जे के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जानी चाहिए।

 

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अभिषेक बनर्जी ने दी पहली प्रतिक्रिया

अभिषेक बनर्जी ने रविवार को दफ्तर ध्वस्तीकरण पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी सरकार के अधीन पुलिस कानून तोड़ने वाली बन गई है। अधिकारियों का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी का सांसदीय कार्यालय स्वीकृत भवन प्लान के मुताबिक नहीं था। इसे अवैध रूप से तैयार किया गया था। नोटिस देने के बाद ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू की गई। जबकि अभिषेक बनर्जी का कहना है कि प्रशासन ने सत्तारूढ़ बीजेपी के साथ मिलीभगत कर यह कार्रवाई की है। 


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