धौलाधार की बर्फीली पहाड़ियों में फंसे दो विदेशी पायलट, कैसे बची जान?
दो विदेशी पैराग्लाइडिंग पायलट बीड़-बिलिंग से उड़ान भरने के बाद निर्धारित लैंडिंग स्थल तक नहीं पहुंच पाए। एक पायलट चार रातें, दूसरा दो रातें दुर्गम पहाड़ों में फंसा रहा।

प्रतीकात्मक तस्वीर। AI इमेज। Photo Credit: Social Media
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की धौलाधार पर्वत शृंखला में पैराग्लाइडिंग के दौरान दो विदेशी पायलटों के अलग-अलग स्थानों पर फंसने का मामला सामने आया है। ऑस्ट्रिया और पोलैंड के रहने वाले इन दोनों पायलटों को रविवार को भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर और स्थानीय बचाव दलों की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया। दोनों पायलट विश्व प्रसिद्ध बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग साइट से उड़ान भरने के बाद निर्धारित लैंडिंग स्थल तक नहीं पहुंच पाए थे।
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, बर्फीली परिस्थितियों, कम तापमान और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में काफी मुश्किलें आईं। इस अभियान में सेना के हेलीकॉप्टर के साथ बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के बचाव दल और पर्वतारोहण विशेषज्ञों ने अहम भूमिका निभाई। कई घंटों की कोशिशों और लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से जूझने के बाद दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली।
ऑस्ट्रियाई पायलट कैसे फंस गया?
रेस्क्यू किए गए पायलटों की पहचान ऑस्ट्रिया के सेबेस्टियन और पोलैंड के एडम विस्जप्यागा के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, सेबेस्टियन ने 22 अक्टूबर को बिलिंग से उड़ान भरी थी, लेकिन वह निर्धारित लैंडिंग स्थल चौगान तक नहीं पहुंच सके। उड़ान के दौरान आपात स्थिति में उनकी पैराग्लाइडिंग धौलाधार की पहाड़ियों में उतर गई। इसके बाद वह करेरी झील के आसपास ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र में फंस गए।
करीब 3,900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस इलाके में कम तापमान, बर्फ और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उनके लिए खुद सुरक्षित स्थान तक पहुंचना आसान नहीं था। उन्हें बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास शुरू किए गए, लेकिन दुर्गम रास्तों और मौसम की चुनौतियों ने बचाव अभियान को मुश्किल बना दिया। सेबेस्टियन को सुरक्षित निकालने के लिए पर्वतारोहण का अनुभव रखने वाले बचावकर्मियों की टीम को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। चार रातें पहाड़ों में बिताने के बाद रविवार को उन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया।
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पहाड़ियों में फंसा था पोलैंड का पायलट
दूसरे पायलट एडम विस्जप्यागा ने 23 अक्टूबर को बिलिंग से उड़ान भरी थी। वह भी अपने निर्धारित लैंडिंग स्थल चौगान तक नहीं पहुंच सके और पालमपुर के उत्तर में धौलाधार की ऊंची पहाड़ियों में फंस गए। रिपोर्टों के अनुसार, वह लगभग 3,600 से 3,800 मीटर की ऊंचाई पर थे। ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में कठिन चट्टानी रास्तों और प्रतिकूल मौसम के कारण बचाव दलों के लिए उन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण रहा।
शनिवार को उन्हें निकालने के प्रयास किए गए, लेकिन खराब मौसम और कम दृश्यता के चलते अभियान में सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद रविवार को दोबारा बचाव अभियान चलाया गया। स्थानीय बचाव दल की मदद से उन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया। दोनों घटनाओं में पायलटों के अलग-अलग स्थानों पर फंसने के कारण बचाव दलों को अलग-अलग रणनीति के साथ काम करना पड़ा।
हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू में आई मुश्किल
धौलाधार पर्वत शृंखला का ऊपरी क्षेत्र अपनी ऊंचाई, खड़ी ढलानों, गहरी खाइयों और तेजी से बदलने वाले मौसम के लिए जाना जाता है। यहां किसी पायलट के पैराग्लाइडिंग के दौरान निर्धारित मार्ग से भटकने या आपात लैंडिंग करने की स्थिति में उसे खोजने और सुरक्षित निकालने में काफी समय लग सकता है।
दोनों विदेशी पायलटों की तलाश के लिए स्थानीय प्रशासन और बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के बचावकर्मी जुटे रहे। शुरुआती प्रयासों के दौरान मौसम और कम दृश्यता ने हेलीकॉप्टर से खोज अभियान में बाधा पहुंचाई। बचाव दलों को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचने के लिए पैदल रास्तों का भी सहारा लेना पड़ा। ऐसे इलाकों में बचावकर्मियों के लिए भी जोखिम कम नहीं होता। कुछ बचावकर्मियों को अभियान के दौरान पहाड़ों में रात बितानी पड़ी।
आखिरकार भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से दोनों पायलटों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली। इस अभियान ने दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में हवाई बचाव सेवाओं की अहमियत को भी सामने रखा है।
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बीड़-बिलिंग में दुनिया भर से पहुंचते हैं पैराग्लाइडिंग के शौकीन
कांगड़ा जिले में स्थित बीड़-बिलिंग दुनिया के प्रमुख पैराग्लाइडिंग स्थलों में शामिल है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और उड़ान के अनुकूल मानी जाने वाली हवाएं देश-विदेश के पायलटों को आकर्षित करती हैं। हर साल बड़ी संख्या में विदेशी और भारतीय पैराग्लाइडर यहां पहुंचते हैं। अक्टूबर के दौरान भी इस क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग गतिविधियां तेज रहती हैं।
ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम का अचानक बदलना, तेज हवाएं, कम दृश्यता और उड़ान के दौरान रास्ता भटक जाना गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। इस घटना में दोनों पायलटों का सुरक्षित बच जाना राहत की बात है, लेकिन यह भी स्पष्ट करता है कि पर्वतीय क्षेत्रों में साहसिक खेलों के दौरान मौसम की जानकारी, उड़ान की योजना और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी कितनी जरूरी है।
मौसम संबंधी निर्देशों की अनदेखी बन सकती है खतरा
धौलाधार की ऊंची पहाड़ियों में सामने आई यह घटना पैराग्लाइडिंग के दौरान सुरक्षा नियमों के पालन की आवश्यकता को फिर रेखांकित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ों में उड़ान भरते समय मौसम की स्थिति, हवा की दिशा, दृश्यता और सुरक्षित लैंडिंग के विकल्पों का आकलन करना जरूरी होता है। पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में उड़ान के दौरान पैदा हुई आपात स्थिति पायलट को निर्धारित लैंडिंग स्थल से दूर किसी दुर्गम क्षेत्र में उतरने के लिए मजबूर कर सकती है।
मोबाइल संपर्क बना रहे, तो बचाव दलों को पायलट की लोकेशन का पता लगाने में मदद मिल सकती है। धौलाधार में फंसे दोनों पायलटों को सुरक्षित निकालने के बाद राहत मिली है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय पैराग्लाइडिंग स्थलों पर सुरक्षा मानकों और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कितनी सतर्कता जरूरी है।
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