संजय सिंह, पटना। बिहार की राजधानी पटना के ज्ञान भवन में आयोजित एक विशेष सेमिनार में सरकार ने बिहार के औद्योगिक भविष्य को लेकर बड़ा रोडमैप पेश किया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार 'इंसेंटिव पॉलिसी 2026' के जरिए निवेश को बढ़ावा देने जा रही है। इसके तहत सरकार बंद पड़ी मिलों को फिर से शुरु करने और साथ ही 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रखी है। इसका मुख्य उद्देश्य बिहार के उन युवाओं को राज्य में ही काम देना है, जो फिलहाल मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं।
सरकार का मानना है कि बिहार कभी चीनी उत्पादन में देश का नेतृत्व करता था और अब उस पुरानी पहचान को वापस लाने का समय आ गया है। इसके लिए न केवल नई तकनीक का सहारा लिया जाएगा, बल्कि किसानों को मुफ्त बीज और मॉडर्न खेती मशीनों पर सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी ताकि गन्ने की पैदावार बढ़ सके।
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सरकार ने किया एलान
सरकार ने इस पॉलिसी के तहत यह घोषणा की है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर उत्तर और दक्षिण बिहार में 25 नई चीनी मिलें स्थापित किया जाएगा। साथ ही, बंद पड़ी मिलों को भी फिर से चालू करने की कोशिशें तेज होंगी।
सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई प्रोत्साहन नीति 'इंसेंटिव पॉलिसी 2026' लागू करने का फैसला लिया है। इस सिलसिले में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अगले 5 वर्षों में बेरोजगारों को चिह्नित कर उन्हें बिहार में ही रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
किसानों को बड़ी राहत
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आजादी के समय बिहार गन्ना उत्पादन में काफी आगे था लेकिन बाद में हालात ऐसे बने कि कई चीनी मिलें बंद हो गईं। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में 16 चीनी मिलें थीं, जो गलत सोच और नीतिगत समस्याओं के कारण बंद हो गईं। फिलहाल नौ मिलें चालू हैं। सरकार का लक्ष्य बंद मिलों को फिर से चालू कर राज्य की खोई हुई पहचान को वापस लाना है।
गन्ना किसानों की मदद के लिए सरकार 5 एकड़ तक के लिए मुफ्त बीज मुहैया कराएगी। इसके अलावा, जलजमाव वाली 66 हजार एकड़ जमीन को खेती योग्य बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों के हित में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। किसानों को पांच एकड़ तक मुफ्त बीज उपलब्ध कराया जा रहा है और खेती की मशीनों पर अनुदान दिया जा रहा है। साथ ही सहकारिता विभाग भी चीनी मिलों के संचालन की दिशा में पहल कर रहा है। उत्तर बिहार के साथ-साथ दक्षिण बिहार के जिलों में भी चीनी मिलें स्थापित करने की योजना है।
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एथेनॉल पर जोर
उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल के अनुसार, चीनी मिलें अब सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं रहेंगी। नई एथेनॉल नीति के तहत इन मिलों के जरिए ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश बढ़ाया जाएगा, जिससे कमाई के नए जरिए खुलेंगे।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने याद दिलाया कि देश की पहली चीनी मिल 1904 में बिहार के मढ़ौरा, सारण में लगी थी। इसी विरासत को आधुनिक तकनीक और 'सात निश्चय-3' के तहत आगे ले जाया जाएगा।
इस सेमिनार में कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया, जहां गन्ने की उन्नत खेती और आधुनिक अनुसंधान के जरिए पैदावार बढ़ाने पर चर्चा की गई।