उत्तर प्रदेश में सड़क परिवहन से जुड़े चालान विवादों के निस्तारण की प्रक्रिया अब और तेज होने जा रही है। केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में संशोधन की तैयारी कर रही है, जिसके तहत अब हर जिले में वाहनों के चालान से जुड़े जुर्माने पर सुनवाई के लिए न्याय निर्णयक प्राधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। ये प्राधिकारी ऑनलाइन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सुनवाई कर अधिकतम 30 दिनों के भीतर फैसला देंगे। आदेश के खिलाफ अपील की भी व्यवस्था होगी, जिसका निस्तारण भी 30 दिन के भीतर करना होगा।
यह व्यवस्था ऐसे मामलों को देखते हुए लाई जा रही है, जिनमें लगातार चालान होने के बावजूद वाहन सड़क पर चलते रहे। उदाहरण के तौर पर 10 जुलाई 2024 को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुए एक दर्दनाक हादसे में पीछे से टक्कर मारने वाली स्कॉर्पियो कार पर 80 से अधिक चालान थे। वहीं 23 फरवरी 2026 को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर पलटी बस का 73 बार चालान हुआ था। यानी लगातार चालान कटते रहे, लेकिन वाहन सड़क पर चलता रहा।
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हर जिले में नियुक्त होंगे न्याय निर्णयक प्राधिकारी
प्रस्तावित संशोधन के तहत मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 167-ख में बदलाव किया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकारें हर जिले में न्याय निर्णयक प्राधिकारी नियुक्त करेंगी। ये अधिकारी चालान और जुर्माने से जुड़े मामलों की ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सुनवाई कर 30 दिनों के भीतर निर्णय देंगे। अगर किसी पक्ष को निर्णय से असहमति होगी तो वह 30 दिनों के भीतर एडीएम या समकक्ष अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील कर सकेगा। अपील का निस्तारण भी 30 दिन में करना होगा। यदि संबंधित अधिकारी समय सीमा का पालन नहीं करते हैं तो उन पर 5,000 से 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।यदि किसी आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर अपील नहीं हो पाती और उचित कारण मौजूद हो, तो 30 दिन बाद भी अपील स्वीकार की जा सकेगी।
अगर वाहन स्वामी न्यायालय या संबंधित अधिकारी के आदेश के बाद भी तय जुर्माना जमा नहीं करता है, तो चालान का निस्तारण होने तक वाहन से जुड़ी अधिकांश सेवाएं रोक दी जाएंगी। ऐसे मामलों में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) का ट्रांसफर, एनओसी, डुप्लीकेट आरसी जैसी सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी। साथ ही, वाहन के कॉलम में यह भी दर्ज कर दिया जाएगा कि उस वाहन से कोई लेनदेन नहीं किया जाए। जिन मामलों में चालान पहले से सक्षम न्यायालय के विचाराधीन हैं, उन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार चालान होने के 90 दिन बाद मामला अदालत भेजने का प्रावधान है।
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प्रदेश में लाखों चालान लंबित
प्रदेश में चालानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024-25 में 27 लाख 56 हजार 786 ई-चालान जारी किए गए, जिनमें आधे से अधिक चार पहिया वाहनों के थे। वहीं 2,79,296 वाहन ऐसे हैं, जिन पर विभिन्न प्रकार के चालान अब भी लंबित हैं। इसके अलावा वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 30 लाख से अधिक वाहनों के चालान किए जा चुके हैं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद चालान विवादों के त्वरित निस्तारण, लंबित मामलों में कमी और बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।