'10 पर्सेंट से ज्यादा EWS आरक्षण', TGT भर्ती पर सपा ने भी उठाए सवाल, समझिए विवाद
UP में हाल ही में निकाली गई TGT भर्ती को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि EWS कैटगरी को 10 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण दिया जा रहा है। समझिए पूरा विवाद क्या है।

TGT भर्ती में आरक्षण पर उठे सवाल, Photo Credit: Social Media
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शिक्षकों की भर्ती निकाली गई है। ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT) की भर्ती निकलते ही आरक्षण को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। सोशल मीडिया पर कई अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि इस भर्ती में आर्थिक आधार पर कमजोर वर्ग (EWS) के तहत तय कोटे से यानी 10 प्रतिशत से ज्यादा सीटें आरक्षित कर दी गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है कि इसे पकड़ने के लिए किसी AI की नहीं, सिर्फ ईमानदार नीयत की जरूरत है। यह भर्ती उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने निकाली है इसलिए उसने जवाब भी दिया है। आयोग ने कहा है कि आरक्षण में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।
UPESSC ने कुछ दिनों पहले PGT की भी भर्ती निकाली थी। अब TGT की भर्ती निकाली गई है। बता दें कि PGT के लिए संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन चाहिए जबकि TGT के लिए ग्रेजुएशन के साथ-साथ बीएड की डिग्री चाहिए। चुनाव से पहले निकाली गई इन भर्तियों को बेहद अहम माना जा रहा है। भर्ती की परीक्षा दिसंबर में होनी है और माना जा रही है कि चुनाव से पहले-पहले नियुक्ति भी दी जा सकती है। ऐसे में इस भर्ती में आरक्षण को लेकर उठे सवाल को लेकर चर्चा गर्म हो गई है।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT) की वैकेंसी निकाली है। कुल 17735 पदों पर भर्ती निकाली गई है। सवाल उठाने वालों का कहना है कि आरक्षण की सीमा के मुताबिक, 10 प्रतिशत सीट ही EWS के लिए आरक्षित होनी चाहिए। इस तरह 1773 सीटें ही EWS के तहत आरक्षित होनी थी लेकिन आयोग ने कुल 2882 सीटें आरक्षित कर रखी हैं। समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं ने इस तरह पिछले वर्ग की सीटें कम किए जाने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, SC वर्ग की सीटें भी कम रखने के आरोप लगाए गए हैं।
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सपा के प्रवक्ता मनोज काका ने इस बारे में एक पोस्ट लिखी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है, 'आज उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की बहुप्रतीक्षित भर्ती आई है लेकिन इस भर्ती में आरक्षण नियमों को ताक पर रखा गया है। भर्ती में हिंदी विषय में कुल-2539 पद हैं। OBC के 27% आरक्षण के हिसाब से उन्हें-685 पद मिलने चाहिए लेकिन विज्ञापन में 566 पद दिए गए हैं। यानी ओबीसी का 119 पद कम कर दिया गया है। EWS को 10% के हिसाब से 253 पद मिलना चाहिए लेकिन उनको 477 पद दिया जा रहा है। इनको कुल 224 पद ज़्यादा मिल रहा है।
आरक्षण के हिसाब से UR (Unreserved & open for all) की 1041 सीटे होनी चाहिए जबकि विज्ञापन में 961 सीटें ही मिल रही हैं। यह सिर्फ हिंदी विषय का आकड़ा है। अन्य विषयों में भी इसी तरह का झोल है। विज्ञापन में सुधार होना चाहिए। आरक्षण के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे।'
https://twitter.com/ManojSinghKAKA/status/2113822202873495834
अखिलेश यादव ने भी उठाए सवाल
इस मामले पर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपने X प्रोफाइल पर लिखा है, 'UP TGT भर्ती में पीडीए समाज के साथ सरेआम नाइंसाफ़ी की जा रही है, जिसमें EWS की सीटें 10% आरक्षण की सीमा से डेढ़ गुनी से भी ज़्यादा हैं और बाक़ी OBC, SC, ST की संख्या निश्चित संख्या से बहुत कम है। इस Logical Discrepancy को पकड़ने के लिए किसी AI की नहीं सिर्फ़ ईमानदार नीयत की ज़रूरत है। युवाओं के धैर्य का बाँध जिस दिन टूट गया उस दिन भाजपाई सत्ता के भ्रष्ट क़िले ढह जाएंगे। इतनी बेईमानी देखकर तो भाजपाइयों के सिर भी झुक गए हैं।'
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https://twitter.com/yadavakhilesh/status/2114365796747272347
विवाद की वजह समझिए
दरअसल, उत्तर प्रदेश में EWS को 10 प्रतिशत, ओबीसी को 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति को 2 प्रतिशत का आरक्षण मिलता है। इस गणना के हिसाब से 17735 पद में EWS के लिए 1773 पद, OBC के लिए 4788 पद, SC के लिए 3724 पद और ST के लिए 354 पद आरक्षित होने चाहिए।
जो वैकेंसी निकाली गई है, उसमें EWS के लिए 2882 पद, OBC के लिए 4438 पद, SC के लिए 3698 पद और ST के लिए 13 पद आरक्षित किए गए हैं। इसी के आधार पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि SC और ST की सीटें कम की गई हैं और EWS की सीटें ज्यादा की गई हैं।
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इस मामले में UPESSC के चैयरमैन प्रशांत कुमार ने दैनिक भास्कर अखबार से बातचीत में कहा है कि आरक्षण प्रक्रिया में कोई चूक नहीं हुई है। उनका कहना है कि भर्ती स्कूल के हिसाब से खाली हुए पदों के आधार पर निकाली गई। प्रशांत कुमार का कहना है कि जिस स्कूल में जिस श्रेणी का पद खाली हुआ है, उसे उसी श्रेणी के तहत विज्ञापित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा है कि सभी पदों को जोड़कर आरक्षण की गणना करना गलत है। उनका कहना है कि विद्यालयों को एक इकाई मानकर आरक्षण लागू किया गया है।
PGT भर्ती में क्या हुआ था?
हमने आयोग के इसी दावे को जांचने के लिए हाल ही में निकली PGT भर्ती में आरक्षित सीटों की संख्या देखी। उस भर्ती में कुल 2607 पद खाली थे। 10 प्रतिशत के हिसाब से EWS की सीटें 260 होतीं लेकिन कुल 215 पद ही आरक्षित थे। 27 प्रतिशत के हिसाब से OBC के लिए 703 सीटें आरक्षित होतीं लेकिन 650 ही हुईं। इसी तरह SC के लिए 21 प्रतिशत के हिसाब से 547 सीटें आरक्षित होनी थीं लेकिन 583 सीटें आरक्षित थीं। ST के लिए कम से कम 52 सीटें आरक्षित होनी थीं लेकिन एक भी सीट आरक्षित नहीं रखी गई।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि कुल संख्या के आधार पर उस भर्ती में भी आरक्षण नहीं लागू था। हमने अपने विश्लेषण में भी पाया कि यह आरक्षण विषय वार भी लागू नहीं था।
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