बनभूलपुरा अतिक्रमण: सुप्रीम कोर्ट में टली सुनवाई, रेलवे की जमीन पर विवाद क्यों?
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर सालों से चले आ रहा अतिक्रमण विवाद सुर्खियों में है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी थी लेकिन टल गई है।

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-ChatGPT
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर सालों से चले आ रहा अतिक्रमण विवाद फिर सुर्खियों में है। 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी थी लेकिन यह अब टल गई है। यह मामला करीब 50 हजार लोगों के भविष्य से जुड़ा है। इस विवाद की जड़ बनभूलपुरा में रेलवे की करीब 30 हेक्टेयर यानी लगभग 74 एकड़ जमीन पर बनें हजारों घर, मस्जिद और मदरसे हैं।
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने दिसंबर 2022 में इस जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद रेलवे ने इस जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए वहां रह रहे लोगों को जगह खाली करने का नोटिस भी थमा दिया।
यह भी पढ़ें: उमर और फारूक अब्दुल्ला ने खड़े होकर गया वंदे मातरम, कांग्रेस को चुभ गई यह बात
क्या है पूरा विवाद?
इस विवाद को समझने से पहले आपको गौला नदी में अवैध खनन से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) के बारे में जानना जरूरी है। यह जनहित याचिका हल्द्वानी के सामाजिक कार्यकर्ता रविशंकर जोशी ने 2013 में उत्तराखंड हाई कोर्ट में दायर की थी। बता दें कि गौला नदी काठगोदाम और हल्द्वानी से बहती है, बनभूलपुरा हल्द्वानी शहर का ही एक प्रमुख और घनी आबादी वाला इलाका है, जो इसी नदी और रेलवे लाइन के पास स्थित है।
इसी मामले की सुनवाई के दौरान हल्द्वानी 'बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण विवाद' सामने आया। इसमें पता चला कि गौला नदी में अवैध खनन करने वाले कई लोग रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा करके रह रहे थे। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने दिसंबर 2022 में इस जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, कोर्ट के आदेश के बाद रेलवे ने इस जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए वहां रह रहे लोगों को जगह खाली करने का नोटिस दे दिया।
हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ स्थानीय लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और तब से यह विवाद चल रहा है। यह विवाद सीधे तौर पर हजारों परिवारों के पुनर्वास, मालिकाना हक और जमीन को लेकर लंबी कानूनी सुनवाई से जुड़ा है।
इस साल फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि जमीन रेलवे की ही है और याचिकाकर्ता उसी जगह बसे रहने का दावा नहीं कर सकते। हालांकि कोर्ट ने इसके साथ इससे प्रभावित परिवारों की पहचान कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत पुनर्वास का मौका देने के निर्देश भी दिए गए।
बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद; कब, क्या हुआ?
- 2013: रविशंकर जोशी ने गौला नदी में अवैध खनन और पुल क्षति को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसमें रेलवे भूमि अतिक्रमण का मुद्दा फिर उठा
- नवंबर 2016: हाई कोर्ट ने रेलवे को 10 हफ्ते में अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया
- दिसंबर 2022: हाई कोर्ट ने करीब 50,000 लोगों को रेलवे भूमि से हटाने का बड़ा आदेश दिया
- जनवरी 2023: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के बेदखली आदेश पर रोक लगाई, मामला शीर्ष अदालत में पहुंचा
- 2023-2025: कोर्ट में कई सुनवाई हुईं, केंद्र-राज्य सरकार और रेलवे को पुनर्वास योजना बनाने के निर्देश दिए गए
- फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि जमीन रेलवे की ही है, प्रभावित परिवारों को PMAY के तहत पुनर्वास का मौका मिलेगा
- 9 सितंबर 2026: इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, आगे इसपर फैसला 17 सितबंर को आने की उम्मीद है।

कौन हैं इसमें शामिल?
इस विवाद में करीब 50,000 निवासी शामिल हैं, जिनके करीब 4,365 परिवारों के 3,500 से ज्यादा घर, मस्जिद और मदरसे रेलवे की जमीन पर बने हैं। दूसरा पक्ष भारतीय रेलवे है, जो इस जमीन पर अपना मालिकाना हक जताता है। तीसरा, मूल याचिकाकर्ता रविशंकर जोशी हैं, जिन्होंने 2013 में गौला नदी में अवैध खनन को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। चौथा, याचिकाकर्ता अब्दुल मतीन सिद्दीकी हैं, जो निवासियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उत्तराखंड सरकार है, जिसे प्रभावित परिवारों की पहचान करने और उन्हें मदद देने की जिम्मेदारी दी गई है। इस मामले में क्रेंद्र सरकार का भी है, जिसे पुनर्वास योजना को लेकर निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इसमें उत्तराखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी है, जो प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन कराने में मदद कर रही है। इन सबके बीच पूरे मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।
यह भी पढ़ें: धरती पर कौन-सी आम चीज अंतरिक्ष में नहीं मिलती? जानें सुनीता विलियम्स का जवाब
कहां से उठा यह विवाद?
यह मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर स्थित बनभूलपुरा इलाके का है, इस पूरे विवाद में जमीन पर करीब 4,365 परिवारों के 3,500 से ज्यादा घर, मस्जिद और मदरसे बने हैं और करीब 50,000 लोगों के लिए है। इसमें भारतीय रेलवे इस जमीन को अपना बताता है और हाई कोर्ट के आदेश के बाद लोगों को जगह खाली करने का नोटिस दे चुका है।
कैसे उठा यह विवाद?
इस विवाद की शुरुआत गौला नदी में अवैध खनन की शिकायत से हुई, लेकिन सुनवाई आगे बढ़ी तो रेलवे की जमीन पर बसी पूरी बस्ती का मुद्दा सामने आ गया। इसके बाद मामला हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अब यह सिर्फ जमीन का विवाद नहीं रहा, बल्कि हजारों परिवारों के घर और उनके पुनर्वास का सवाल भी बन गया है।
अब आगे क्या?
आज यानी 9 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई है। याचिकाकर्ता अब्दुल मतीन सिद्दीकी के मुताबिक कोर्ट ने मामले को आगे बढ़ा दिया है। तब तक बनभूलपुरा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने की बात सामने आई है। नैनीताल एसएसपी मंजुनाथ टी.सी. के नेतृत्व में तैनात पुलिस और पीएसी बल इलाके में मौजूद रहेंगे और ड्रोन से निगरानी जारी रहेगी।
पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील भी की है। इससे पहले 24 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट अपना एक फैसला सुना चुका है, जिसमें कोर्ट ने प्रभावित परिवारों की पहचान कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत पुनर्वास के लिए आवेदन का मौका देने के निर्देश दिए थे। अब आगे की सुनवाई में यही तय होगा कि बेदखली और पुनर्वास प्रक्रिया को किस तरह और कब आगे बढ़ाया जाएगा।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | EDITORIAL POLICY | Sitemap




