आमतौर पर डीजल और पेट्रोल के दाम एक्साइज ड्यूटी और VAT बढ़ने या कच्चा तेल महंगा होने पर बढ़ते हैं। अब हिमाचल प्रदेश में डीजल और पेट्रोल के दाम विधवा और अनाथ सेस लगाए जाने के चलते बढ़ गए हैं। राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने मंगलवार को फैसला लिया है कि एक लीटर डीजल या पेट्रोल पर 60 पैसे का विधवा और अनाथ सेस लगाया जाएगा। यह फैसला 11 अगस्त की आधी रात से ही लागू हो गया है यानी आज से आपको डीजल-पेट्रोल 60 पैसे महंगा मिलेगा। अब चर्चा इस खास सेस की भी हो रही है क्योंकि इसके बारे में कम सुना या पढ़ा गया है।
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स ऐक्ट 2025 की धारा 6-A के तहत इस तरह का सेस वसूला जा सकता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया गया यह सेस पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर वसूला जाएगा। यह सिर्फ बिक्री वाली जगह पर लगेगा यानी हर स्टेप पर लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि सिर्फ ग्राहकों को ये 60 पैसे चुकाने होंगे जिससे अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
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कहां से आया विधवा और अनाथ सेस?
इसी साल हिमाचल प्रदेश सरकार ने मार्च के महीने में हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स (संशोधन) बिल, 2026 को विधानसभा में पास करवाया था। इसका मकसद यह बताया गया था कि विधवाओं और अनाथ बच्चों के लिए फंड इकट्ठा किया जा सके। तब यह भी कहा गया था कि यह सेस अधिकतम 5 रुपये प्रति लीटर तक ही हो सकता है ताकि इसका बोझ ग्राहकों पर ज्यादा न पड़े। इससे जुड़ा बिल विधानसभा में पहले ही पास किया जा चुका है तो कानूनी तौर पर यह सही है। इस बढ़ोतरी के बाद हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक लीटर पेट्रोल 103.45 रुपये में मिलेगा।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 6 हजार से ज्यादा अनाथ बच्चे हैं जिन्हें 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' का दर्जा दिया गया है। लगभग 7 हजार विधवा महिलाएं भी हैं। इन दोनों वर्गों के लाभार्थियों को पहले से भी कई योजना का लाभ दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश सरकार विधवा महिलाओं के बच्चों की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च भी उठाती है। इसका लाभ इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत दिया जा जाता है। इसी तरह मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत अनाथ बच्चों को 26 साल की उम्र तक हर महीने 4000 रुपये दिए जाते हैं।
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गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर जोर दे रही है। सरकार का तर्क है कि इस तरह के उपकर से प्राप्त धनराशि को जरूरतमंद वर्गों के हित में खर्च किया जाएगा। हालांकि, ईंधन की कीमत बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका भी है। इसके चलते विपक्ष सहित आम जनता में सरकार के प्रति रोष भी देखा जा रहा है।
कितने पैसे इकट्ठा होंगे?
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड अनैलसिस सेल के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025-26 में हिमाचल प्रदेश में हर दिन लगभग 14 से 15 लाख लीटर होती थी। इसी तरह डीजल की खपत हर दिन 25 से 26 लाख लीटर प्रतिदिन थी। अगर इसके हिसाब से विधवा और अनाथ सेस जोड़ें तो पेट्रोल पर लगभग 8.5 से 9 लाख रुपये और डीजल पर हर दिन लगभग 15 लाख रुपये जुटाए जा सकेंगे। महीने के हिसाब से यह राशि कुल मिलाकर 7 करोड़ से ज्यादा होगी और साल भर में कुल 80 से 90 करोड़ रुपये जुटाए जा सकेंगे।