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चुनाव से पहले पंजाब में SIR, क्या कट जाएगा विदेश में रह रहे पंजाबियों का नाम?

पंजाब चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। अब पंजाब में इसे लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और विदेश में रह रहे लोगों की बेचौनी भी बढ़ गई है।

SIR

सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: AI

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पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से हर राज्य में चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर जमकर बवाल हो रहा है। पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले लाखों वोटरों के नाम लिस्ट से काट दिए गए और अंतिम समय तक लोगों में असमंजस की स्थिति बनी रही। ममता बनर्जी की पार्टी आरोप लगा रही है कि बीजेपी ने SIR से ही चुनाव जीता है। इसके बाद अब अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होंगे और विधानसभा चुनाव से करीब 7 महीने पहले यहां भी SIR की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य में  SIR को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।

 

चुनाव आयोग ने राज्य में व्यापक स्तर पर मतदाता सूची की जांच और सत्यापन की तैयारी शुरू कर दी है। पंजाब में 25 जून से यह प्रक्रिया शुरू होगी और 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। इस बीच सबसे बड़ा सवाल उन लाखों पंजाबियों को लेकर उठ रहा है जो विदेशों में रह रहे हैं। क्या लंबे समय से बाहर रहने वाले लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं? इसी मुद्दे पर अब पंजाब की राजनीति गर्माने लगी है। कांग्रेस तमाम विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील कर रही है। 

 

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विदेश में रहते हैं लाखों पंजाबी

चुनाव आयोग के अनुसार SIR का उद्देश्य फर्जी, डुप्लीकेट और गलत एंट्री हटाकर मतदाता सूची को अपडेट करना है। इसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर वोटरों का सत्यापन करेंगे। जिन लोगों की मौत हो चुकी है, जो किसी दूसरे इलाके में शिफ्ट हो चुके हैं या जिनके नाम दो जगह दर्ज हैं, उनके नाम हटाए जा सकते हैं। नए पात्र मतदाताओं को भी सूची में जोड़ा जाएगा लेकिन पंजाब में मामला थोड़ा अलग है। राज्य के लाखों लोग कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के अन्य देशों में रहते हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनके परिवार पंजाब में हैं और उनका नाम अब भी स्थानीय वोटर लिस्ट में दर्ज है। अब SIR के दौरान इन्हीं नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।

 

राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर सत्यापन प्रक्रिया में विदेश में रहने वाले मतदाताओं को गैरमौजूद माना गया तो बड़ी संख्या में नाम कट सकते हैं। खासकर उन परिवारों में चिंता बढ़ी है जहां बेटे या बेटियां कई सालों से विदेश में हैं लेकिन भारतीय नागरिकता बरकरार है।

1 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

विदेश में रहने वालों का क्या होगा?

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है और उसकी नागरिकता समाप्त नहीं हुई है तो उसका नाम मतदाता सूची में बना रह सकता है। हालांकि,  स्थायी रूप से विदेश में बस चुके या किसी दूसरे देश की नागरिकता ले चुके लोगों के मामले में स्थिति अलग हो सकती है। SIR के दौरान ऐसे मामलों की जांच की जाएगी और कई ऐसे लोग भी हैं जो स्थायी रूप से विदेश में रहने लगे हैं लेकिन चुनाव के दौरान वोट करने पंजाब आते हैं। 

ERO करेंगे जांच

SIR प्रक्रिया शुरू होने से विदेश में रहने वाले पंजाबियों की बेचैनी बढ़ गई है। विदेश में रह रहे पंजाबियों का वोट भले ही पंजाब में बना हुआ है लेकिन वह विदेश में रह रहे हैं तो उन्हें खुद को पंजाब का निवासी साबित करना होगा। अगर वह ऐसा नहीं कर सकते हैं तो उनका वोट कट जाएगा। पंजाब में लाखों ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने अपना स्थानीय ठिकाना स्थायी रूप से छोड़ दिया है। इन में से कुछ ने तो दूसरे देशों की स्थायी नागरिकता भी ले ली है। कुछ लोग हर चुनाव में वोट करने पंजाब में आते हैं। हमेशा के लिए विदेश में बस चुके ऐसे पंजाबियों को साबित करना होगा कि वे पंजाब के सामान्य निवासी हैं। 

 

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अगर कोई पंजाबी खुद को पंजाब का सामान्य निवासी साबित नहीं कर पाया तो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसर (ERO) एक-एक केस की गहनता से जांच करेंगे और वे ही तय करेंगे कि संबंधित व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहेगा या नहीं। अगर किसी व्यक्ति का आधार कार्ड मान्य नहीं होगा तो उसके सरकार की ओर से जारी कोई ऐसा दस्तावेज जमा करवाना होगा जो उन्हें स्थानीय निवासी साबित कर सके।

विपक्ष उठा रहा सवाल

पंजाब कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने भी इस प्रक्रिया के समय को लेकर सवाल उठाए हैं। नेताओं का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी वोटर लिस्ट जांच प्रक्रिया शुरू करना लोगों में भ्रम और डर पैदा कर सकता है। कुछ नेताओं ने आशंका जताई है कि इससे बड़ी संख्या में वोट प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस के नेताओं ने सवाल उठाए कि उत्तर प्रदेश में पहले SIR हो गया जबकि दोनों राज्यों में एक साथ चुनाव होंगे। 


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