हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल के बीच कुल्लू सदर के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की मंत्री पद की दावेदारी एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से सुंदर ठाकुर को मंत्री बनाए जाने के संकेत पहले भी मिलते रहे हैं, लेकिन अब दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर सामाजिक समीकरणों को लेकर मंथन की चर्चा ने इस दावेदारी को फिर पेचीदा बना दिया है।
सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस कैबिनेट में एक और ठाकुर चेहरे को जगह देगी या फिर एससी-ओबीसी प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी?
कैबिनेट का मौजूदा जातीय गणित क्या है?
मौजूदा 11 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री समेत पांच मंत्री राजपूत/ठाकुर समुदाय से हैं। इनमें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के अलावा हर्षवर्धन चौहान, रोहित ठाकुर, अनिरुद्ध सिंह और विक्रमादित्य सिंह शामिल हैं।
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इसके बाद ब्राह्मण समुदाय के दो चेहरे हैं। इनमें उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और मंत्री राजेश धर्माणी शामिल हैं। वहीं एससी समुदाय के दो मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल और यादविंदर गोमा हैं। ओबीसी से चंद्र कुमार और एसटी से जगत सिंह नेगी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
मौजूदा कैबिनेट का सामाजिक समीकरण
- ठाकुर/राजपूत: 5
- ब्राह्मण: 2
- अनुसूचित जाति: 2
- ओबीसी: 1
- एसट : 1
यही आंकड़ा अब सुंदर ठाकुर की दावेदारी के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर रहा है। अगर सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाता है तो ठाकुर समुदाय से मंत्रियों की संख्या पांच से बढ़कर छह हो जाएगी। ऐसे में कांग्रेस के भीतर यह तर्क जोर पकड़ सकता है कि कैबिनेट में जिन सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है, उन्हें और जगह दी जाए। खासकर ओबीसी और एससी वर्ग के प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग ने पूरे समीकरण को प्रभावित कर सकता है।
सुंदर ठाकुर के लिए क्षेत्रीय समीकरण भी मजबूत
हालांकि सुंदर सिंह ठाकुर की दावेदारी केवल जातीय समीकरण तक सीमित नहीं है। वह कुल्लू से आते हैं और मंत्रिमंडल में कुल्लू जिले का प्रतिनिधित्व भी फिलहाल बड़ा सवाल है। ऐसे में उनके पक्ष में क्षेत्रीय संतुलन और कुल्लू को प्रतिनिधित्व देने का तर्क मजबूत है। यही वजह है कि सुंदर ठाकुर का नाम पूरी तरह दौड़ से बाहर नहीं माना जा सकता। लेकिन हाईकमान यदि सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देता है तो उनकी राह फिर मुश्किल हो सकती है।
एससी-ओबीसी कार्ड चला तो कौन-कौन होगा दावेदार?
अगर कांग्रेस हाईकमान ठाकुर चेहरे के बजाय एससी या ओबीसी प्रतिनिधित्व बढ़ाने का फैसला करता है तो कई विधायकों की दावेदारी मजबूत हो सकती है। ऐसे में पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल और ज्वालामुखी के विधायक संजय रतन जैसे नामों पर भी चर्चा होना स्वाभाविक है।
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कैबिनेट विस्तार से पहले दिल्ली में 'जातीय गणित' का टेस्ट
कांग्रेस के लिए कैबिनेट विस्तार अब केवल खाली पद भरने का मामला नहीं रह गया है। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन साधना होगा। एक तरफ कुल्लू से सुंदर ठाकुर की मजबूत दावेदारी है तो दूसरी तरफ मौजूदा कैबिनेट में पांच ठाकुर चेहरों का आंकड़ा हाईकमान के सामने है। ऐसे में अगर दिल्ली से एससी-ओबीसी को ज्यादा हिस्सेदारी का संदेश आता है तो सुंदर ठाकुर की मंत्री पद की राह एक बार फिर लंबी हो सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुक्खू की पसंद चलेगी या दिल्ली का सामाजिक समीकरण? अगर दिल्ली का फॉर्मूला भारी पड़ा तो सुंदर ठाकुर की ताजपोशी एक बार फिर खटाई में पड़ सकती है।