झारखंड के रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह नाम देवेंद्र नाथ महतो है। रांची में हजारों छात्रों के प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे देवेंद्र को अब कई लोग
सोनम वांगचुक
2.0 कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं और उन्हें सोनम वांगचुक 2.0 क्यों कहा जा रहा है?
दरअसल देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई सालों से झारखंड के प्रतियोगी छात्रों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, समय पर भर्ती और युवाओं की समस्याओं को लेकर वह लगातार सक्रिय रहे हैं। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने और छात्रों को एकजुट रखने की वजह से आज उन्हें इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है।
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कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। साधारण परिवार से आने वाले देवेंद्र ने अपनी पढ़ाई मेहनत के दम पर पूरी की। उन्होंने 2006 में मैट्रिक और 2008 में इंटरमीडिएट पास किया। इसके बाद रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत विषय में ग्रेजुएशन किया। आगे चलकर उन्होंने बीएड की पढ़ाई पूरी की और फिर संस्कृत तथा कुरमाली भाषा में अलग-अलग विषयों से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री भी हासिल की।
पढ़ाई के साथ-साथ देवेंद्र नाथ छात्र हित के मुद्दों पर भी लगातार सक्रिय रहे हैं। साल 2015 से वह छात्रवृत्ति में गड़बड़ी, भर्ती प्रक्रिया में देरी, पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर छात्रों के साथ खड़े रहे हैं। छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी मां को भी खो दिया था लेकिन इसके बावजूद उन्होंने छात्रों के हक की लड़ाई नहीं छोड़ी।
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क्यों हो रही है सोनम वांगचुक से तुलना?
देवेंद्र नाथ महतो की तुलना सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से इसलिए की जा रही है क्योंकि उन्होंने भी अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने का रास्ता चुना है। रांची में चल रहे आंदोलन के दौरान उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की अपील की और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर उन्हें सोनम वांगचुक 2.0 कहा जाने लगा।
छात्रों की मांग है कि भर्ती परीक्षाएं साफ और ईमानदारी से कराई जाएं, समय पर रिजल्ट आए और नियुक्ति में बेवजह देरी न हो। कई छात्र संगठन भी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। सरकार ने कुछ कदम उठाने की बात कही है लेकिन छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।