शौर्य चक्र... यह सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर की वीरता और शहादत की पहचान है। लखनऊ की 80 वर्षीय सावित्री सक्सेना आज इसी शौर्य चक्र को लौटाने की बात कह रही हैं। आखिर ऐसी क्या वजह है कि जिस सम्मान को एक मां ने वर्षों तक बेटे की शहादत की निशानी के तौर पर संभालकर रखा, अब उसी पदक को वापस करने की नौबत आ गई?
दरअसल, सावित्री सक्सेना के बेटे सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना ने देश की रक्षा करते हुए आतंकवादियों से लोहा लिया और मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। उनके अदम्य साहस और वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र और राष्ट्रपति पुलिस पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया था।
ग्राम मिरानपुर पिनवट निवासी सावित्री सक्सेना के बेटे विवेक सक्सेना उस समय सहायक कमांडेंट के पद पर तैनात थे। 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।बेटे की वीरता को देश ने सलाम किया और उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। मां के लिए यह पदक बेटे की बहादुरी और उनकी आखिरी यादों से जुड़ा हुआ है।
सम्मान के बाद भी खत्म नहीं हुई मां की लड़ाई
सावित्री सक्सेना का कहना है कि बेटे की शहादत के बाद सरकार की ओर से परिवार को जमीन आवंटन का शासनादेश भी हुआ। वर्षों बीतने के बाद भी उन्हें इसका लाभ नहीं मिल सका। अपने अधिकार के लिए वह कई बार अधिकारियों के कार्यालय पहुंचीं और आईजीआरएस के माध्यम से भी शिकायतें कीं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका आरोप है कि शिकायतें एक विभाग से दूसरे विभाग तक भेजी जाती रहीं।
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समाधान दिवस में पदक लेकर पहुंचीं मां
80 वर्षीय सावित्री सक्सेना अपने बड़े बेटे रंजीत सक्सेना के साथ समाधान दिवस में पहुंचीं। इस दौरान वह अपने साथ बेटे को मिले शौर्य चक्र और वीरता पदक भी लेकर आई थीं।उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनके बेटे ने देश के लिए अपनी जान दे दी, लेकिन परिवार को आज भी अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
‘न्याय नहीं मिला तो लौटा दूंगी शौर्य चक्र’
सावित्री सक्सेना ने साफ शब्दों में कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह शौर्य चक्र, वीरता पदक और सम्मान राशि का चेक तक वापस करने को मजबूर होंगी। एक शहीद की मां का यह बयान अब व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है, जिस बेटे की वीरता को देश ने शौर्य चक्र देकर सम्मानित किया, क्या उसी शहीद के परिवार को अपने अधिकार के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे?
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अधिकारी ने दिया जांच का आश्वासन
समाधान दिवस में मां की शिकायत सुनने के बाद एसडीएम अभिषेक कुमार सिंह ने मामले की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।अब देखना यह है कि शहीद की मां को आखिर कब तक अपने हक के लिए इंतजार करना पड़ेगा और क्या उनकी वर्षों पुरानी मांग का समाधान हो पाएगा।