उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में SIT की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले SIT ने ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का बयान दर्ज किया है। क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महिपाल का बयान लिया। इसमें महिपाल ने वर्ष 2021 से अब तक चढ़ावा चोरी की घटनाओं और वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों और बैंक कर्मचारियों के नाम लिए हैं। SIT इस बयान को अपनी जांच का आधार बनाएगी।
महिपाल ने अपने बयान में आरोप लगाया कि दानपेटी की गिनती के दौरान चोरी और निर्माण सामग्री के बिलों में हेराफेरी वर्ष 2021 से की जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि चोरी का पता चलने पर उन्होंने पूर्व महासचिव चंपत राय को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिपाल ने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और टिन्नू यादव समेत ट्रस्ट व बैंक कर्मचारियों के नाम भी लिए हैं। उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं होने की बात भी बयान में कही गई है। SIT अब महिपाल के बयान को अपनी जांच का आधार बनाएगी।
बैंक कर्मचारियों से भी मिलीभगत का लगाया आरोप
महिपाल ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से भी गड़बड़ी की गई। उनके अनुसार, चंपतराय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू के ट्रस्ट के बैंक के एक काउंटर पर नोटों के अधिक बंडल रखकर ले जाने की बात सामने आई, जबकि रजिस्टर पर कम बंडलों का अंकन होता था। महिपाल ने यह भी बताया कि मंदिर की शेष राशि तक पहुंचने के लिए राम कचहरी मंदिर में ट्रस्ट का कार्यालय खोला गया था, जबकि अन्य मंदिरों में निशुल्क स्थान उपलब्ध कराया जा रहा था।उन्होंने दावा किया कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय करोड़ों रुपये की हार चोरी हो गई थी लेकिन इसके बावजूद टिन्नू और धर्मवीर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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जून में मीडिया के सामने भी लगाए थे आरोप
चढ़ावा चोरी को लेकर महिपाल ने जून महीने में मीडिया के सामने भी कई आरोप लगाए थे। उन्होंने सीधे तौर पर चंपतराय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर अनजान बने रहने का आरोप लगाया था। इससे पहले गठित एसआईटी ने भी महिपाल का बयान दर्ज किया था, जिसकी फाइनल रिपोर्ट अब ट्रस्ट को सौंप दी गई है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक बयान का वीडियो भी तैयार किया गया है, जिसे कोर्ट में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
चढ़ावा चोरी मामले में बीती 26 जून से जेल में निरुद्ध आठ आरोपियों की शनिवार को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई। सुनवाई के बाद न्यायिक हिरासत सातवीं बार 14 दिनों के लिए, यानी 18 सितंबर तक, बढ़ा दी गई। मामले की जांच कर रही पुलिस को विवेचना करते हुए करीब 72 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक आरोप पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है। दूसरी ओर, जेल में करीब 1708 घंटे बिताने के बाद आरोपी अविनाश शुक्ल, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, ललतकुश मिश्रा, कृष्णकांत पांडेय, रामाश्रय यादव और सुभाष श्रीवास्तव की ओर से अदालत में जमानत अर्जी दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया गया है। अदालत ने अर्जियां दर्ज करते हुए संबंधित थाने से आख्या तलब की है।
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SIT रिपोर्ट पर टिकीं निगाहें
महिपाल के नए बयान के बाद एसआईटी के सामने अब पहले से दर्ज आरोपों, बैंक रिकॉर्ड, ट्रस्ट के दस्तावेजों और निर्माण सामग्री के बिलों का मिलान करने की चुनौती है। जांच में जिन ट्रस्ट पदाधिकारियों और बैंक कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। आरोपों की पुष्टि जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।