उत्तराखंड के ऋषिकेश से कुछ दिन पहले एक खबर सामने आई थी जिसमें खुलासा हुआ था कि कफन के कपड़ों से कंबल बनाकर उन्हें बेचा जा रहा है। इस मामले में एक गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी भी मिली थी। इस खबर के बाद अब हरिद्वार में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। हर की पैड़ी और उसके आसपास के घाटों पर गंगा सभा और तीर्थ पुरोहितों ने एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत घाटों के किनारे दुकान लगाने वाले सभी लोगों के आधार कार्ड की जांच की जा रही है।
अभियान से जुड़े पुरोहितों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि प्रतिबंधित क्षेत्र में कोई भी गैर-हिंदू व्यापार न कर सके। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक किसी भी सरकारी अधिकारी की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है।
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कुंभ 2027 से पहले उठ रही मांग
यह मांग कुंभ 2027 की तैयारी की शुरुआत से पहले ही उठने लगी थी, जिसमें घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई थी। पुजारी उज्ज्वल पंडित ने कहा कि यदि कोई गैर-हिंदू इस क्षेत्र में व्यवसाय करते हुए पाया जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत श्री गंगा सभा को दी जाएगी ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
ऋषिकेश का मामला
ऋषिकेश के रानीपोखरी थाना क्षेत्र में एक मामला सामने आया, जिसमें आरोप है कि मृत व्यक्तियों के उपयोग में आए बिस्तरों से रूई निकालकर उसे नई रूई में मिलाकर बेचा जा रहा था। इस घटना के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और संबंधित दुकानों पर हंगामा करते हुए उन्हें बंद करा दिया। बजरंग दल के अध्यक्ष नरेश उनियाल ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली हैं। उन्होंने बताया कि कुछ युवक मृतकों के बिस्तरों से रूई निकालकर उसमें नई रूई मिलाकर बाजार में बेच रहे थे।
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इस मामले में अमित सिंह की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की। सनीपोखरी थाना प्रभारी विकेंद्र के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोप सही पाए जाने पर सलमान, हामिद और संजय नाम के तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है।
वहीं, देहरादून के रानीपोखरी क्षेत्र में भी लोगों के अपने मृत परिजनों की फेंकी गई रजाई-गद्दों को उठाकर दूसरों को बेचने के आरोप में तीन लोगों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस के अनुसार, स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद दुकानों की जांच की गई, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।