logo

मूड

ट्रेंडिंग:

'सब अकलोल, बकलोल हैं...', अपनी ही जाति के 6 सांसदों पर क्यों भड़के आनंद मोहन?

पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह इन दिनों अपनी ही जाति के सांसदों पर भड़के हुए हैं। अब उन्होंने कहा है कि 6 लोग संसद तो पहुंच गए लेकिन किसी में अपनी बात रखने का साहस नहीं है।

anand mohan singh

आनंद मोहन सिंह, File Photo Credit: Social Media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

बिहार के मोतिहारी में आयोजित जातीय सम्मेलन में पूर्व सांसद आनंद मोहन का अंदाज बेहद हमलावर रहा। मंच से उन्होंने बेटे और पूर्व विधायक चेतन को लेकर अपना दर्द खुलकर बयां किया। साथ ही उन्होंने अपनी ही जाति से लोकसभा पहुंचे छह सांसदों पर ऐसा सियासी तीर चलाया कि बिहार की राजनीति में हलचल मच गई। आनंद के तेवर देख साफ लग रहा था कि वह अब पूरी आक्रामकता से मैदान में उतर चुके हैं। दरअसल वह अपने बेटे चेतन आनंद को मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में अचानक चेतन का विधानसभा क्षेत्र भी बदल दिया गया था। उन्होंने अपने बेटे के साथ अन्याय की बात कही और सजातीय सांसदों के बारे में कहा कि वे संसद पहुंच गए हैं लेकिन अकलोल, बकलोल हैं, अपनी बात रखने का साहस नहीं है।

 

आनंद मोहन ने कहा कि उनके बेटे चेतन के बारे में पार्टी ने जो सर्वे रिपोर्ट मंगवाई थी, वह सिरे से गलत थी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में चेतन को कमजोर दिखाया गया जबकि हकीकत यह है कि जो लोग पहली बार चुनाव जीते, वे सीधे विधायक से मंत्री तक बन गए। अपने बेटे के बारे में आनंद मोहन ने कहा, 'चेतन आनंद दो बार विधायक रहा, जनता के बीच रहा, फिर भी उसके साथ न्याय नहीं हुआ।' यह कहते वक्त आनंद मोहन की आवाज में बेटे के सियासी भविष्य को लेकर गहरी कसक थी। पंडाल में मौजूद समर्थकों ने जोरदार तालियों से उनकी बात का समर्थन किया। इसकी वजह है कि वर्तमान राज्य सरकार राजपूत जाति के दूसरे नेताओं को ज्यादा महत्व दे रही है। वैसे भी आनंद मोहन के लगातार जेल में रहने की वजह से राजपूत समाज पर इनकी पकड़ कमजोर हुई है।

 

यह भी पढ़ें:  संभल SP की फर्जी ID से साइबर फ्रॉड की कोशिश, कारोबारी से मांगे 85 हजार

अपनी जाति के सांसदों पर निशाना

आनंद मोहन यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपनी जाति के छह सांसदों पर सीधा निशाना साधा। आनंद मोहन ने कहा, '6 सांसद संसद तो पहुंच गए लेकिन किसी में अपनी बात रखने का साहस नहीं है। सब अकलोल, बकलोल हैं। किसी को मंत्री बनाने लायक नहीं समझा गया। सभी के गले में पार्टी का पट्टा है और उन्हें सिर्फ भौंकने का काम दिया गया है।' उनके इस बयान के बाद पूरा सम्मेलन तालियों से गूंज उठा।

 

आनंद मोहन की इस आक्रामकता के कई मायने निकाले जा रहे हैं। पहला, बेटे चेतन का राजनीतिक पुनर्वास। चेतन पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। आनंद मोहन चाहते हैं कि पार्टी बेटे को सम्मानजनक जगह दे। दूसरा, खुद की सियासी जमीन मजबूत करना। जेल से रिहाई के बाद से वह लगातार जातीय सम्मेलनों के जरिए जनाधार टटोल रहे हैं। तीसरा, आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दबाव की राजनीति। छह सांसदों पर हमला कर उन्होंने संदेश दिया कि संसद में उनकी जाति का कोई मजबूत पैरोकार नहीं है। यह खाली जगह वह खुद या बेटे से भरना चाहते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आनंद मोहन किसी बड़े दल से बेटे के लिए टिकट और सम्मानजनक भूमिका की गारंटी चाहते हैं।

 

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र TET पेपर लीक केस का बिहार से क्या कनेक्शन निकल आया? समझिए पूरी बात

 

सम्मेलन में बिहार विधान परिषद सदस्य महेश्वर सिंह ने कहा कि समाज के साथ हर स्तर पर न्याय होना चाहिए। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेन्द्र सिंह ने कहा कि महापुरुषों के आदर्शों पर चलकर ही समाज आगे बढ़ेगा।

क्या बोले आनंद मोहन?  

जातीय कार्ड खेलते हुए आनंद मोहन ने कहा, 'मैंने समाज के लिए जेल काटी। हमेशा सच बोला। जब अपने बेटे के साथ अन्याय होता है तो बोलना पड़ता है। सर्वे के नाम पर धोखा हुआ। छह सांसद दिल्ली गए हैं पर समाज के हक की बात एक बार भी नहीं उठाई। उनके गले में पार्टी का पट्टा है। उन्हें सिर्फ दूसरों पर भौंकने के लिए रखा गया है। समाज सब देख रहा है। वक्त आने पर जवाब देगा।'

 

आनंद मोहन के बयान के बाद सियासी गलियारे में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिन छह सांसदों पर निशाना साधा गया, उनके समर्थक सफाई में जुट गए हैं। RJD और JDU के नेता फिलहाल खामोश हैं। BJP के कुछ नेताओं ने इसे 'पारिवारिक भावना' बताया है। आनंद मोहन के तेवर से तय है कि वह विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी भूमिका में दिखेंगे। बेटे चेतन के लिए वे सम्मानजनक सियासी जगह चाहते हैं। अगर बात नहीं बनी तो नया समीकरण भी बना सकते हैं। फिलहाल उनके बयान ने जातीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर छह सांसदों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर है।  वह चाहते हैं कि राजनीति में उनका पहले जैसा वजूद कायम रहे ।

Related Topic:#bihar news

और पढ़ें