उत्तर प्रदेश में ऑटोमोबाइल बाजार का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। पिछले एक महीने में डीजल कारों की मांग में अचानक उछाल आया है। हालत यह है कि कई लोकप्रिय डीजल मॉडल की डिलीवरी के लिए ग्राहकों को दो से तीन महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है।
कारोबारी बताते हैं कि पहले जहां 15 से 25 दिन में वाहन मिल जाते थे, वहीं अब लंबी वेटिंग चल रही है। पेट्रोल कारों की तुलना में डीजल वाहन सवा से डेढ़ लाख रुपये तक महंगे होने के बावजूद उनकी मांग लगातार बढ़ रही है। कारोबारी इसकी वजह लंबी दूरी पर बेहतर माइलेज और E20 पेट्रोल को लेकर ग्राहकों में बनी आशंकाओं को मान रहे हैं।
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एक महीने में तेजी से बढ़ी डिमांड, सीमित उत्पादन से बढ़ी वेटिंग
ऑटोमोबाइल कारोबारियों के मुताबिक डीजल कारों की मांग पिछले एक महीने में तेजी से बढ़ी है। कंपनियां पहले से ही डीजल मॉडल का सीमित उत्पादन कर रही हैं। मांग बढ़ने के बाद डीलरों के पास पर्याप्त स्टॉक नहीं है, जिससे ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
हजरतगंज स्थित हुंडई शोरूम में दो महीने तक की वेटिंग
हुजरतगंज स्थित हुंडई शोरूम के महाप्रबंधक रिजवान अंसारी ने बताया कि नई गाड़ियां E20 पेट्रोल के हिसाब से आ रही हैं और उनकी बिक्री भी अच्छी हो रही है। इसके बावजूद डीजल कारों की मांग अधिक है। शोरूम में ऑर्डर लगातार मिल रहे हैं, लेकिन हुंडई क्रेटा और हुंडई वेन्यू के डीजल मॉडल पर करीब दो महीने तक की वेटिंग चल रही है।
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एमजी मोटर्स: ग्लॉस्टर पर तीन महीने तक इंतजार
एमजी मोटर्स के लखनऊ बिजनेस हेड आरिफ खान ने बताया कि कंपनी की डीजल एसयूवी एमजी ग्लॉस्टर पर करीब तीन महीने की वेटिंग चल रही है। हर महीने 10 से 15 गाड़ियों की बुकिंग हो रही है, लेकिन उत्पादन सीमित होने से समय पर डिलीवरी देना चुनौती बना हुआ है।
टाटा मोटर्स के सेल्स हेड प्रिंस कालरा के मुताबिक डीजल वाहनों की मांग में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे अधिक मांग टाटा सफारी की है, जिस पर करीब डेढ़ महीने की वेटिंग चल रही है। इसके अलावा टाटा नेक्सन और टाटा अल्ट्रोज के डीजल मॉडल की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
क्यों बढ़ रही है डीजल कारों की मांग?
कारोबारियों का कहना है कि पेट्रोल में
एथेनॉल
मिश्रण (E20) को लेकर लोगों के बीच लगातार चर्चा हो रही है। इसके अलावा डीजल वाहन लंबी दूरी तय करने वाले ग्राहकों के लिए बेहतर माइलेज और कम रनिंग कॉस्ट का विकल्प बने हुए हैं। यही वजह है कि महंगे होने के बावजूद ग्राहक डीजल कारों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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ऑटो मैकेनिक क्या कह रहे हैं?
लखनऊ के वरिष्ठ ऑटो मैकेनिक राजेश वर्मा का कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। उनके मुताबिक यदि कोई पुराना पेट्रोल मॉडल E20 के अनुरूप नहीं है और उसमें लगातार E20 ईंधन का उपयोग किया जाए तो लंबे समय में फ्यूल पाइप, रबर सील, इंजेक्टर और इंजन के कुछ हिस्सों पर असर पड़ सकता है। वहीं नई E20-कंप्लायंट कारों में ऐसी समस्या सामान्य रूप से नहीं होती। उन्होंने वाहन मालिकों को कंपनी की गाइडलाइन के अनुसार ही ईंधन का उपयोग करने की सलाह दी है।