उत्तर प्रदेश में वाहन मालिकों को जल्द ही क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के चक्कर लगाने से बड़ी राहत मिलने वाली है। परिवहन विभाग वाहनों के ट्रांसफर से लेकर पंजीकरण तक की अधिकांश सेवाओं को ऑटो अप्रूवल या स्वतः स्वीकृत प्रणाली से जोड़ने जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद निर्धारित समय सीमा में आवेदन स्वतः स्वीकृत हो जाएंगे और आवेदकों को बार-बार आरटीओ कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा।
सरकार पहले इसे पायलट परियोजना के रूप में एक जिले में लागू करेगी। इस फैसले का परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। शासन ने इस मुद्दे पर 20 जुलाई को बैठक बुलाई है। इससे पहले विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी बैठक कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
52 सेवाएं होंगी ऑटो अप्रूवल के दायरे में
नई व्यवस्था के तहत सारथी (ड्राइविंग लाइसेंस) और वाहन (वाहन पंजीकरण) पोर्टल से जुड़ी 52 ट्रांसपोर्ट सेवाओं को ऑटो अप्रूवल मोड में लाया जा रहा है। इनमें से 10 सेवाएं पहले से फेसलेस हैं, जबकि 12 अन्य सेवाओं को हाल ही में मंजूरी मिली है। शेष सेवाओं को भी चरणबद्ध तरीके से ऑटो मोड में शामिल करने की तैयारी चल रही है।
गाड़ियों के ट्रांसफर में सबसे बड़ी राहत
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा वाहन खरीदने और बेचने वालों को मिलेगा। वाहन नामांतरण, स्वामित्व हस्तांतरण, उत्तराधिकार और मृत्यु के बाद स्वामित्व परिवर्तन जैसे मामलों में आवेदन निर्धारित समय सीमा पूरी होने पर स्वतः मंजूर हो जाएंगे। इसके लिए एनआईसी विशेष बीटा संस्करण विकसित कर रही है। एनओसी जारी करने की प्रक्रिया को पुलिस सत्यापन डाटा से भी जोड़ा जा रहा है।
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दलालों पर लगेगी लगाम, OTP से होगा सत्यापन
परिवहन विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने से आरटीओ कार्यालयों में दलालों की भूमिका काफी हद तक खत्म होगी और भीड़ भी कम होगी।
- आवेदनकर्ता का सत्यापन आधार, पैन और डिजिलॉकर से होगा
- ओटीपी केवल आवेदक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर जाएगा
- तकनीकी गड़बड़ियां रोकने के लिए बीटा वर्जन की लगातार टेस्टिंग और समीक्षा की जा रही है
- परिवहन आयुक्त के निर्देश पर एनआईसी को तय समय में तकनीकी खामियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं
- लर्नर डीएल की प्रक्रिया भी होगी आसान
लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अब ट्रैफिक नियमों से जुड़े वीडियो देखने की अवधि 20 मिनट से घटाकर पांच मिनट की जाएगी। इसके विकल्प तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही डीएल आवेदन में आने वाली लॉगिन और अपलोडिंग संबंधी दिक्कतों को दूर करने के लिए सर्वर अपग्रेड किया जाएगा। इस संबंध में यूपीडेस्को और एनआईसी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
इन सेवाओं के लिए अभी भी जाना होगा आरटीओ
पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद कुछ कार्यों के लिए आवेदकों को आरटीओ या परीक्षण केंद्र जाना होगा-
- नए ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ड्राइविंग टेस्ट
- बायोमैट्रिक सत्यापन
- डीजल वाहन श्रेणी विस्तार (दोपहिया से चार पहिया आदि)
- वाहनों में तकनीकी बदलाव से जुड़े आवेदन
- विंटेज वाहनों का पंजीकरण।
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नई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आ सकती हैं।
मुख्य आपत्तियां क्या हैं?
वाहन खरीद-फरोख्त आपसी सहमति पर आधारित होती है, केवल ओटीपी से स्वामित्व सत्यापन विवाद का कारण बन सकता है। जनसेवा केंद्रों के माध्यम से ओटीपी प्रक्रिया का दुरुपयोग होने की आशंका जताई जा रही है। एक मोबाइल नंबर से परिवार के कई वाहन जुड़े होने पर ट्रांसफर में परेशानी आ सकती है।
अभी नए वाहन का पंजीकरण डीलर के आवेदन के बाद आरटीओ में भौतिक सत्यापन के जरिए पूरा होता है। स्वतः स्वीकृति लागू होने पर डीलरों की मनमानी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद पूरे प्रदेश में होगी शुरुआत
परिवहन विभाग के अनुसार नई प्रणाली पहले एक जिले में पायलट आधार पर लागू की जाएगी। यदि परिणाम सकारात्मक रहे तो इसे पूरे उत्तर प्रदेश के सभी आरटीओ कार्यालयों में लागू किया जाएगा। विभाग का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, सेवाओं में तेजी आएगी, लोगों का समय बचेगा और आरटीओ कार्यालयों में भीड़ तथा दलालों का प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो जाएगा।