सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थलों से हटाने की बात दोहराई है। मंगलवार को नवंबर 2025 के अपने आदेश को दोहराते हुए स्कूल, अस्पताल, खेल परिसर, रेलवे स्टेशन और बस डिपो से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश शीर्ष अदालत ने दिया है। राजधानी दिल्ली में अभी तक एक भी स्थायी डॉग शेल्टर नहीं बना है। इन इलाकों में कितने कुत्ते हैं, इसका कोई सही आंकड़ा भी नहीं है।
आदेश आने के 6 महीने बाद भी काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। कोर्ट का यह आदेश सिर्फ संस्थागत जगहों पर लागू होता है। आवासीय इलाकों या सड़कों पर यह लागू नहीं है। कुत्तों को हटाने का काम केवल नगर निगम के अधिकारी ही कर सकते हैं, आम लोग नहीं।
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इकलौता डॉग शेल्टर तैयार में होने में लगेंगे 8 महीने
दिल्ली का पहला स्थायी कुत्ता आश्रय द्वारका सेक्टर 29 में बनने वाला है। इसमें 1500 कुत्तों को रखा जा सकेगा। इसकी अनुमानित लागत 3.5 करोड़ रुपये है, लेकिन अभी यह सिर्फ कागजों पर ही है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक फंड हाल ही में पास हुआ है। इसे तैयार होने में अभी भी 6 से 8 महीने लग सकते हैं।
नगर निगम के पास कु्त्तों को रखने के इंतजाम
नगर निगम के पास कुत्तों को स्थायी रूप से रखने की कोई जगह नहीं है। मौजूदा एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर सिर्फ नसबंदी और कुछ वक्त तक रखने के लिए हैं। बिजवासन, बेला रोड, उस्मानपुर और रोहिणी में नए नसबंदी केंद्र बनाने की योजना भी विभागीय देरी की वजह से अटकी हुई है।
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दिल्ली में कितने कु्त्ते,कितना खर्च आएगा?
निगम अधिकारियों का कहना है कि एक कुत्ते को स्थायी शेल्टर में रखने पर रोजाना 110 रुपये खर्च होंगे। इसमें खाना, दवा, सफाई, परिवहन और स्टाफ का खर्च शामिल है। शुरू में कुछ हजार कुत्तों के लिए ही बजट रखा गया है। दिल्ली में आवारा कुत्तों की सही संख्या का पता नहीं है। आखिरी जनगणना 16 साल पहले हुई थी। अनुमान है कि करीब 10 लाख कुत्ते हैं। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक निगम ने 1,01,394 कुत्तों की नसबंदी की है।
फैसले पर क्या सवाल उठ रहे हैं?
पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि कोर्ट ने सिर्फ पुराना आदेश दोहराया है। पूरे देश में छह महीने से कोई भी राज्य या जिला आदेश का पालन नहीं कर रहा था।निगम अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के नए स्पष्ट आदेश के बाद काम तेज किया जाएगा।