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क्या संगीनों के साथ ITBP जवानों ने कानपुर कमिश्नरेट घेरा? पूरा विवाद क्या है?

कानपुर कमिश्नरेट में आईटीबीपी के जवान बड़ी संख्या में पहुंचे। देखते ही देखते पूरा परिसर संगीनों के साये में आ गया। जवानों की तैनाती का स्टाइल देखकर हर कोई हैरान हो गया। किसी कुछ समझ में आता, उससे पहले कमिश्नरेट के घेराव का दावा किया जाने लगा।

Kanpur News

कानपुर कमिश्नरेट में तैनात आईटीबीपी जवान। (Photo Credit: Social Media)

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उत्तर प्रदेश के कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में शनिवार को अप्रत्याशित नजारा देखने को मिला। यहां बड़ी संख्या में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहुंचे। देखते ही देखते बंदूक हाथ में लिए आईटीबीपी के जवान पूरे कमिश्नरेट परिसर में तैनात हो गए।

 

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए। इनमें आम जनमानस से लेकर पत्रकारों तक ने आईटीबीपी द्वारा कानपुर कमिश्नरेट को घेरने का दावा किया, लेकिन अचानक इतनी बड़ी संख्या में आईटीबीपी जवानों का कमिश्नरेट पहुंचना... दिनभर कौतूहल का विषय बना रहा। आइये समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है, पुलिस और आईटीबीपी ने क्या कहा?

 

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पहले बैकग्राउंड समझिए

आईटीबीपी के जवान विकास ने कानपुर के प्राइवेट कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि लापरवाही के कारण उनकी मां का हाथ काटना पड़ा। 13 मई को सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन यानी 14 मई को ही दाहिने हाथ में सूजन आ गई। मामला गंभीर होने पर मां को दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों ने हाथ में संक्रमण की बात कही और 17 मई को हाथ काटा गया। 

 

 

दो दिनों तक जवान ने पुलिस के चक्कर लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद विकास अपनी मां निर्मला देवी का कटा हाथ लेकर कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। यहां अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की। शुक्रवार को सीएमओ ने अपनी रिपोर्ट जमा की। रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं पर जवान ने आपत्ति दर्ज कराई।

 

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक सुबह करीब सवा 11 बजे आईटीबीपी के 100 जवान कमिश्नरेट पहुंचे। वहां आईटीबीपी की 15 से अधिक गाड़ियां खड़ी थीं। आईटीबीपी के अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था डॉ. विपिन कुमार ताडा से मुलाकात की।

 

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कानपुर पुलिस ने जवान की शिकायत के बाद सीएमओ से बात की थी, क्योंकि मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा था। सीएमओ ने डॉक्टरों की एक समिति बनाई और मामले की जांच की। शुक्रवार इस समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की। आईटीबीपी के जवान ने रिपोर्ट पर डॉक्टरों को बचाने और अस्पताल को क्लीनचिट देने का आरोप लगाया। जब अस्पताल को क्लीनचिट देने के बारे में सीएमओ डॉक्टर हरिदत्त नेमी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमने कोई क्लीनचिट नहीं दी है, सिर्फ रिपोर्ट सौंपी है। बता दें कि कांस्टेबल विकास सिंह कानपुर के महाराजपुर स्थित आईटीबीपी की 32वीं बटालियन में तैनात हैं।

घेराबंदी के सवाल पर आईटीबीपी ने क्या कहा?

आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद ने कहा कि आप सबको पता होगा कि हमारे एक जवान के माता का हाथ कट गया है। उसी संबंध में मैंने कल सर से अपॉइंटमेंट लिया था। कमिश्नर सर से मिलने के लिए आया था। आज मैं और मेरे अधिकारी व जवान यहां पर आए थे। मैं अंदर सर के पास बैठा था। बाहर जवान खड़े थे। शायद मीडिया ने इसे गलत रूप से ले लिया है। हमने कोई घेरने की कार्रवाई नहीं की है। कमिश्नर सर की तरफ से हमें पूरा सपोर्ट है, जो भी जांच रिपोर्ट आएगी तो न्याय होगा। सर के ऊपर हमें पूरा भरोसा है। बस इतना ही कहना चाहता हूं।

 

घेराव के सवाल पर कानपुर पुलिस क्या बोली?

उधर, एसीपी कानून व्यवस्था डॉ. विपिन ताडा ने शनिवार को हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले एक आईटीबीपी के जवान एक एप्लीकेशन लेकर आए थे, जिसमें उनका आरोप था कि एक अस्पताल द्वारा लापरवाही से इलाज करने के कारण उनकी माता जी का हाथ काटना पड़ा। हाई कोर्ट के आदेशानुसार प्रकरण सीएमओ को भेजा गया, क्योंकि यह मामला स्वास्थ्य लापरवाही का है।

 

सीएमओ ने नियमानुसार डॉक्टरों की समिति गठित करके सभी पहलुओं की जांच करवाई। जो रिपोर्ट आई, उसको लेकर प्रार्थी आज दोबारा अपने अधिकारियों के साथ प्रस्तुत हुआ, उन्होंने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई। सीएमओ से बात करने के बाद आपत्ति वाले बिंदुओं पर दोबारा जांच पर सहमति बनी। जांच के आधार पर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी।

 

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जब उनसे कमिश्नरेट घेराव के बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आईटीबीपी का जवान अपने कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यहां आया था। उस दौरान उनके हमराह बाहर खड़े थे। वार्ता करने पर उन्होंने अपने जवानों को वापस भेज दिया। उन्होंने बताया कि यह कोई इस प्रकार (घेराव) का कार्य नहीं था। वह सिर्फ वार्ता करने आए थे। 

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