उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड में पुलिस ने एक नई गिरफ्तारी की है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनके नाम बीते कुछ महीनों में कई बार खूब सियासत हुई। उन पर बीजेपी के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने आरोप लगाया था कि अंकिता केस में सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के कुछ वीडियो जानबूझकर बीजेपी नेताओं को बदनाम करने के मकसद से फैलाए गए थे।
पुलिस अधीक्षक (सिटी) प्रमोद कुमार ने समाचार एजेंसी भाषा से कहा, 'सुरेश राठौर को हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र स्थित उनके कार्यालय से हिरासत में लिया गया और फिर देहरादून के डालनवाला थाने लाया गया, जिसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।'
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क्यों गिरफ्तार हुए हैं सुरेश राठौर?
सुरेश राठौर की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने 12 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि उत्तराखंड हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ बहादराबाद और झबरेड़ा थानों में दर्ज 4 प्राथमिकियों में से 2 को रद्द कर दिया है।
क्यों FIR हुई थी?
अंकिता भंडारी मर्डर केस से जुड़े खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं। सुरेश राठौर ने कहा था कि डालनवाला और नेहरू कॉलोनी थानों में दर्ज बाकी दो मामलों की जांच अब भी जारी है। उनका दावा है कि वह अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चार जून को इस मामले में राठौर के खिलाफ दर्ज चार प्राथमिकियों में से दो को रद्द कर दिया था। जस्टिस राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने हालांकि बाकी दो प्राथमिकियों में पुलिस जांच जारी रखने की अनुमति दे दी थी।
सुरेश राठौर पर क्या आरोप थे?
शिकायतकर्ता दुष्यंत गौतम और आरती गौर ने कहा था कि जो सामग्री फैलाई गई, उसका मकसद जान-बूझकर उनकी बदनामी करना था। इस मामले में सार्वजनिक किए गए क्लिप में राठौर ने बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी गौतम की कथित तौर पर पहचान VIP के तौर पर की थी। पूर्व विधायक ने शुक्रवार को हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत में इस बात से इनकार किया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई ऑडियो या वीडियो क्लिप जारी की थी या पार्टी के वरिष्ठ नेताओं या मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई टिप्पणी की थी।
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अपनी सफाई में क्या कह रहे हैं सुरेश राठौर?
सुरेश राठौर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनके राजनीतिक करियर को नुकसान पहुंचाने के लिए एक साजिश रची गई थी। राज्य सरकार में मंत्री देशराज कर्णवाल ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में हाई कोर्ट से मिली राहत के बारे में सुरेश राठौर के दावों को गलत और गुमराह करने वाला बताया।
अंकिता मर्डर केस क्या है?
पौड़ी जिले के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 साल की अंकिता भंडारी सितंबर 2022 में लापता हो गई थीं। बाद में उनका शव बरामद किया गया था। इस घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। रिसॉर्ट के मालिक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में उनकी हत्या का दोषी ठहराया गया।