तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में शनिवार को डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (DVAC) ने पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू के घर पर छापेमारी की। DVAC आज द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी (DMK) पार्टी के वरिष्ठ नेता नेहरू के घर पहुंची, इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ता ने भी बाहर जमा हो गए। यह मामला नगरपालिका प्रशासन और जलापूर्ति विभाग में हुए कथित करोड़ों रुपये के भर्ती घोटाले से जुड़ा है। इसे बदले की कार्रवाई बताते हुए दर्जनों DMK नेता भी के ए नेहरू के घर के बाहर जमा हो गए।
बताया गया है कि भर्ती में कथित गड़बड़ी का यह मामला तब का है जब के. एन नेहरू म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन और वाटर सप्लाई मंत्री थे। उस दौरान 2,538 लोगों की भर्ती में कथित गड़बड़ियां सामने आई थीं। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री
जोसेफ विजय
के विपक्ष पर तीखे हमला किया था। अब यह मामला एक बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है।
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क्या है पूरा विवाद?
तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद डीएमके के नेता जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गए हैं। पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू पिछली एम. के. स्टालिन सरकार में नगरपालिका प्रशासन एवं जलापूर्ति (MAWS) विभाग संभालते थे। नेहरू पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में इस विभाग में करीब 2,538 पदों की भर्ती में बड़े पैमाने पर पैसे लेकर नौकरी देने का यानी कैश-फॉर-जॉब्स घोटाला हुआ।
बता दें कि यह मामला पहले से ही अदालत में चल रहा था। अब मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने जब विधानसभा में विपक्ष (DMK) पर सीधा हमला बोला, इसके बाद DVAC ने नेहरू से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। इससे यह विवाद और गहरा गया है, विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है।
किसके खिलाफ है केस, कौन-कौन इसमें शामिल?
यह मामला मुख्य रूप से डीएमके के पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू के खिलाफ दर्ज किया गया है, जो पिछली स्टालिन सरकार में नगरपालिका प्रशासन एवं जलापूर्ति (MAWS) विभाग के मंत्री रह चुके हैं। DVAC ने नेहरू के साथ-साथ उनके रिश्तेदारों और विभाग के कई सरकारी अधिकारियों को भी FIR में नामजद किया है। अप्रैल 2025 में ED ने नेहरू, उनके बेटे पेरम्बलूर अरुण नेहरू और भाई-व्यवसायी के.एन. रविचंद्रन से जुड़े ठिकानों पर भी छापेमारी की थी, जो एक कंपनी से जुड़े करीब 30 करोड़ रुपये के कथित बैंक फ्रॉड मामले में हुई थी।
इसी जांच के दौरान ED को MAWS विभाग की भर्तियों में गड़बड़ी के सबूत मिले थे। अक्टूबर 2025 में तमिलनाडु पुलिस को सौंपा गया। इसके बाद में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर 20 फरवरी 2026 को नेहरू व अन्य के खिलाफ यह FIR दर्ज हुई।
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कब-क्या हुआ?
- अप्रैल 2025: ED ने KN नेहरू, बेटे अरुण नेहरू और भाई रविचंद्रन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की, जो एक कंपनी से जुड़े करीब 30 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में थी
- 27 अक्टूबर 2025: ED ने PMLA की धारा 66(2) के तहत MAWS विभाग की 2,538 भर्तियों में गड़बड़ी के सबूत तमिलनाडु पुलिस को सौंपी।
- 20 फरवरी 2026: मद्रास हाईकोर्ट ने DVAC को तुरंत FIR दर्ज करने का सख्त आदेश दिया, कोर्ट ने कहा कि राज्य जानबूझकर देरी कर रहा है।
- 5 जून 2026: हाईकोर्ट ने राज्य को नेहरू व अन्य के खिलाफ 23 जून तक कोई सख्त कार्रवाई न करने का निर्देश दिया।
- 10 अगस्त 2026: नेहरू की FIR-रिव्यू याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और गिरफ्तारी पर रोक जारी रही।
- 10 मई 2026: तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन,
थलपति विजय
(TVK) मुख्यमंत्री बने, डीएमके विपक्ष में आई।
- 5 सितंबर 2026: विधानसभा में CM विजय के विपक्ष पर हमले के बाद, DVAC ने चेन्नई और तिरुचिरापल्ली में नेहरू से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की

कहां चल रहा है यह पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद तमिलनाडु राज्य से जुड़ा है। खासतौर से चेन्नई, जहां DVAC ने कुछ ठिकानों पर तलाशी की है, जबकि मुख्य कार्रवाई तिरुचिरापल्ली शहर में हो रही है, जहां पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू के आवास पर छापेमारी की गई है। इस मामले की कानूनी लड़ाई चेन्नई स्थित मद्रास हाईकोर्ट में चल रही है।
क्यों हुई यह कार्रवाई?
इसके पीछे की वजह पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू पर लगे आरोप हैं, उनके मंत्री रहते MAWS विभाग में करीब 2,538 पदों की भर्ती में पैसे लेकर नौकरियां बांटी गईं। अप्रैल में ED को इसके सबूत मिले थे, जिसके आधार पर मद्रास हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में DVAC को FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। DVAC ने इसी मामले में जांच आगे बढ़ाते हुए नेहरू के ठिकानों पर तलाशी शुरू की है।
अब आगे क्या?
इस मामले में राजनीतिक हलचल जारी है। फिलहाल DVAC नेहरू के आवास और अन्य ठिकानों से मिले दस्तावेज व सबूतों की जांच जारी रखेगी। पूछताछ या कार्रवाई हो सकती है। दूसरी ओर मद्रास हाईकोर्ट में नेहरू की FIR-रिव्यू याचिका पर फैसला अभी सुरक्षित रखा गया है। कोर्ट का यही फैसला तय करेगा कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी जैसी सख्त कार्रवाई हो सकती है या नहीं। राजनीतिक तौर पर डीएमके इसे बदले की कार्रवाई बता रही है। ऐसे में इस पूरे विवाद पर सत्तारूढ़ TVK सरकार और विपक्षी डीएमके के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है।