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मलकानगिरी में तीर-धनुष लेकर किससे भिड़े आदिवासी? इंटरनेट बंद करना पड़ा

ओडिशा के मलकानगिरी में हालात तनावपूर्ण हैं। एक आदिवासी महिला की लाश मिलने के बाद बरपा हंगामा, अब तक शांत नहीं हो पाया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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मलकानगिरी में सुरक्षा के लिए बंगाली समुदाय प्रदर्शन कर रहा है। (Photo Credit: Social Media)

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ओडिशा का मलकानगिरी जिला, हिंसा की जद में आ गया है। एक आदिवासी महिला की लाश मिलने के बाद ग्रामीण आपस में ऐसे भिड़े कि पूरे जिले में पुलिस को इंटरनेट सेवाएं बंद करनी पड़ी हैं। मलकानगिरी के हिंसा प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में रैपिड ऐक्शन फोर्स को तैनात किया गया है। 

स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाके में इंटरनेट सेवाएं तत्काल प्रभाव से रोक दी हैं। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैली अफवाह के बाद हालात इतने तनावपूर्ण हो गए इंटरनेट बैन करना पड़ा। अब मलकानगिरी में वॉट्सऐप, फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी बैन हैं। 

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मलकानगिरी में हिंसा क्यों भड़की?

मलकानगिरी में 4 दिसंबर को एक महिला की सड़ी-गली लाश मिली थी। राखेलगुडा नदी के पास आदिवासी लाश देखकर भड़क गए। उनका कहना था कि यह हत्या बंगाली बस्ती के लोगों ने जमीन विवाद के सिलसिले में की है। गुस्साए ग्रामीणों ने बंगाली बस्ती पर हमला किया, जिसमें 12 से ज्यादा घरों में तोड़फोड़ हुई, 4 घर जला दिए गए। राखेलगुड़ा गांव के लगभग 5,000 आदिवासी कुल्हाड़ी, धनुष-तीर लेकर मलकानगिरी विलेज-26 गांव पहुंचे। उन्होंने बंगाली परिवारों के घरों और दुकानों में आग लगाई और लूटपाट की। मलकानगिरी विलेज-26 में करीब 100 बंगाली परिवार रहते हैं। कई परिवारों ने हिंसा के बाद गांव छोड़ दिया है। बंगाली समुदाय के लोग सोमवार सुबह से ही कलेक्टर ऑफिस के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं और हिंसा करने वालों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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हत्या क्यों हुई है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हत्या, जमीन विवाद के सिलसिले में हुई है। आदिवासी समुदाय सभी आरोपियों पर तुरंत कार्रवाई चाहता है, इसलिए गुस्सा भड़क गया। पुलिस का कहना है कि मामले की छानबीन जारी है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  

आदिवासी और बंगाली समुदाय में अरसे से रही है रंजिश

मलकानगिरी में आदिवासी और बंगाली समुदाय के बीच लंबे समय से तनाव है रहा है। साल 1956 में भारत सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए हिंदू बंगाली शरणार्थियों को कोरापुट और बस्तर जिले में बसाया था। तब मलकानगिरी कोरापुट का हिस्सा था। बंगाली बस्तियों के नाम मलकानगिरी विलेज से शुरू होते हैं। आदिवासी समुदाय लंबे समय से इन बस्तियों की मौजूदगी का विरोध करता रहा है। 

जिला प्रशासन ने अब क्या किया है?

जिला प्रशासन ने पूरे मलकानगिरी में 24 घंटे के लिए मोबाइल और ब्रॉडबैंड इंटरनेट बंद कर दिया है। दो गांवों में पांच से ज्यादा लोगों के एक साथ जमा होने पर भी रोक लगा दी गई।  पुलिस ने हत्या के आरोप में बंगाली समुदाय के सुभरंजन मंडल को गिरफ्तार किया है। 

अब कैसे हालात हैं?

रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है। पुलिस ने हिंसा करने के आरोप में दो लोगों को हिरासत में लिया है। एसपी विनोद पाटिल ने कहा कि अब हालात काबू में हैं।

 

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