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बिहार शिक्षा विधेयक: UG कॉलेज अब राज्यपाल के नियंत्रण से बाहर, क्या बदलेगा?

मानसून सत्र में बिहार विधानसभा में नए शिक्षा विधेयक को पेश किया जाएगा। विधेयक पर हंगामे के आसार हैं।

Samrat choudhary

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, Photo Credit: Social Media

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बिहार सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में एक नया शिक्षा बिल लाने जा रही है। अगर यह विधेयक पास हुआ तो अब राज्य के 500 से ज्यादा सरकारी डिग्री कॉलेज अब गवर्नर के नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे। राज्यपाल, विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी होते हैं।  

राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने 12 जुलाई को एक कार्यक्रम में इस विधेयक के आने की पुष्टि की थी। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के सभी 534 ब्लॉकों में एक-एक डिग्री कॉलेज खोला जाए। 

सरकार का दावा है कि यह बदलाव बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए लाया जा रहा है। इस विधेयक पर भी मानसून सत्र के दौरान हंगामा होने के आसार जताए जा रहे हैं।

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नए विधेयक से क्या-क्या बदलेगा?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नए बदलावों के बाद सभी अंडरग्रेजुएट (UG) कॉलेज सीधे नए उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आ जाएंगे। गवर्नर केवल पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्सेस की देखभाल करेंगे। अब कॉलेजों के शिक्षकों की नियुक्ति, प्रमोशन, ट्रांसफर और अन्य प्रशासनिक फैसले विश्वविद्यालयों के बजाय सीधे सचिवालय से होंगे। 

शिक्षकों पर क्या पाबंदी लगेगी?

नए नियमों के अनुसार, कॉलेज के शिक्षक राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकेंगे और न ही किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार कर सकेंगे। हर जिले में एक हायर एजुकेशन अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जो स्कूलों के डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (DEO) की तरह काम करेगा। 

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डिग्री कॉलेज के शिक्षक नहीं बन सकेंगे यूनिवर्सिटी प्रोफेसर

डिग्री कॉलेज के शिक्षक अब विश्वविद्यालय स्तर के प्रोफेसर नहीं बन पाएंगे। डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए मास्टर्स डिग्री के साथ NET पास करना जरूरी होगा, PhD की जरूरत नहीं रहेगी।


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