संजय सिंह, पटना: राज्यसभा चुनाव के पहले प्रदेश का राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। 9 अप्रैल 2026 को बिहार में राज्यसभा 5 सीटें खाली हो रहीं हैं। बिहार में इन सीटों पर अभी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल (यूनाइटेड) से 2-2 और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक राज्यसभा सांसद हैं। राज्यसभा जाने के लिए 41 विधायकों की जरुरत एक सदस्य को होती है।
संख्या बल कम होने के वावजूद RJD की कोशिश है कि राज्यसभा की एक सीट उसे मिल जाए। इसके लिए RJD को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) से हाथ मिलाना होगा। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने इसके लिए RJD के सामने दो प्रस्ताव रखा है। पहला यह कि दबंग के रुप में विख्यात दिवंगत पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना साहेब को उम्मीदवार बनाया जाए। दूसरा विधान परिषद की एक सीट AIMIM को मिले।
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राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है?
राज्यसभा का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को 10 विधायकों को प्रस्तावक बनाना होता है। इस चुनाव में विधायक ही वोट डालते हैं। प्रत्येक विधायक का वोट 100 के बराबर होता है। जीतने के लिए उम्मीदवार को कुल वोटों का एक चौथाई प्लस एक वोट प्राप्त करना होता है। इस तरह बिहार से राज्यसभा जाने वाले उम्मीदवारों को 41 वोट की जरूरत होगी। यह संख्या फिलहाल महागठबंधन के घटक दल RJD के पास नहीं है। विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने एआईएमआईएम को अपने गठबंधन में जगह नही दिया था।
पहले कौन थे सदस्य?
राज्यसभा में JDU कोटे से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर और वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश नारायण सिंह सदस्य हैं। रामनाथ ठाकुर केंद्रीय मंत्री भी हैं। उन्हें फिर से राज्यसभा में भेजा जा सकता है। इधर हरिवंश राज्यसभा के उप सभापति हैं। भारतयी जनता पार्टी (BJP) ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा के संस्थापक उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा में जगह दी थी। RJD ने प्रेमचंद्र गुप्ता और एडी सिंह को राज्यसभा भेजा था। RJD के पास अपने विधायकों की संख्या इतनी कम है कि वह एक भी उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने में सक्षम नहीं है।
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मौजूदा समीकरण क्या इशारा कर रहे हैं?
NDA गठबंधन के पास विधायकों की संख्या 202 है। बीजेपी के पास 89, JDU के पास 82, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के पास 5, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पास 19 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास 4 विधायक हैं। पांच सीटों पर विजय पाने के लिए एनडीए को 205 विधायकों की जरूरत है। एनडीए के पास 3 विधायक कम है। एनडीए भी जोर शोर का प्रयास शुरु कर दी है।
महागठबंधन में RJD के पास 25, कांग्रेस के पास 6, CPI (ML) (L) के पास 2, CPI के पास एक, IIP के पास एक विधायक है। ऐसी स्थिति में बिना AIMIM के 5 और BSP के एक विधायक का समर्थन लिए बिना RJD एक भी प्रत्याशी को राज्यसभा नही भेज सकती है। इसी वजह से RJD ने असदुद्दीन ओवैसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। अगर बात बनती है तो बिहार में एक नया राजनीतिक समीकरण देखने को मिलेगा।
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फायदे में रहेंगे ओवैसी
RJD के राजनीति का मूल आधार मुस्लिम और यादव समीकरण है। इस बार के विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी ने सीमांचल में इस समीकरण को तोड़ दिया। उसके 5 विधायक यहां विजयी हुए। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मुस्लिम वोट बैंक के भरोसे ही राजनीति करती है। अगर राष्ट्रीय जनतादल (RJD) हिना शहाब को उम्मीदवार बनाती है तो मुसलमानों के बीच बेहतर राजनीति संदेश जाएगा। मुनाफे में AIMIM को एक मुस्लिम विधान पार्षद भी मिल जाएगा। ऐसी स्थिति में पार्टी का जनाधार बढ़ेगा।
हिना शहाब कौन हैं?
हिना शहाब, गैंगस्टर और पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हैं। वह सीवान लोकसभा क्षेत्र से आती हैं। बिहार की राजनीति में शहाबुद्दीन कुख्यात रहा है। हिना शहाब ने 2009, 2014 और 2019 में आरजेडी टिकट पर चुनाव लड़ा था, उन्हें हार मिली थी। साल 2024 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरीं और दूसरे स्थान पर रहीं। बाद में वह बेटे ओसामा के साथ आरजेडी में वापस लौटीं। अभी वह आरजेडी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वह अपनी जनसभाओं में बुर्का पहनकर जाती हैं। मुस्लिम समाज में उनकी स्वीकार्यता है। आरजेडी के मुस्लिम-यादव समीकरण के सियासी गठजोड़ में फिट बैठते हैं। उनके बेट ओसामा शहाब, रघुनाथपुर से विधायक है।