दीवाली से एक दिन पहले उत्तराखंड की सियासत में तूफान आ गया है। असम की रहने वाली जेनी ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर 16 साल की उम्र में दुष्कर्म का आरोप लगाया। महिला ने अपने बच्चे के डीएनए टेस्ट की मांग की और कहा कि मेरे बेटे को इंसाफ व पिता का नाम मिले। देहरादून में शनिवार को जेनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और दावा किया कि उनके साथ जो हुआ है, वह किसी के साथ नहीं हुआ होगा।
पीड़िता का कहना है कि आज उनका बेटा 23 साल का हो गया है, लेकिन उसे बाप का नाम नहीं मिला है। आरोप लगाया कि 16 साल की उम्र में हरक सिंह रावत ने उसका दुष्कर्म किया और पागलखाने में रखा। महिला ने पूरी कहानी बताई कि वह कैसे हरक सिंह रावत के घर तक पहुंची थी? जेनी ने अब उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से भी मदद मांगी है। बता दें कि साल 2003 में जेनी का मामला खूब चर्चा में रहा है। उस वक्त डीएनए टेस्ट कराया गया था। इसमें हरक सिंह रावत को क्लीनचिट मिल गई थी।
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सिर्फ एक बार पागलखाने आई सीबीआई टीम
सीबीआई जांच के सवाल पर जेनी ने कहा कि सीबीआई की टीम सिर्फ एक बार पागलखाने आई थी। उस वक्त मेरी हालत बेहद खराब थी। उन्होंने पूरे मामले की दोबारा सीबीआई जांच और बेटे के डीएनए टेस्ट की मांग की।
मुझसे कहा गया- देहरादून में कदम नहीं रखना
जब जेनी से पूछा गया कि इतने वर्षों बाद सामने क्यों आईं? तब उन्होंने कहा कि मुझे कहा गया था कि देहरादून में कदम नहीं रखना। बड़े-बड़े अधिकारियों ने भी कहा था। सुनवाई के दौरान जज तक ने भी मुझसे कुछ नहीं पूछा।
मैं देहरादून तीसरी बार आई हूं
पत्रकारों के सवाल पर जेनी ने कहा, 'मैं इतने दिनों बाद क्यों आई हूं, क्योंकि वह (हरक सिंह) वक्त पावर में थे और कहते थे कि आपका केस दोबारा नहीं खुलेगा। जब सीएम साहब ने मेरा नाम लिया तो मैं हिम्मत करके दून अस्पताल बेटे का बर्थ सर्टिफिकेट लेने आई थी। मैं सीएम साहब की बहुत आभारी हूं।' जेनी ने बताया कि मैं पहली बार तब आई थी जब मेरे साथ यह घटना हुई थी। दोबारा बच्चे का जन्मप्रमाण पत्र लेने आई और अब तीसरी बार यहां आई हूं।
कार्यकर्ता रावत के आवास ले गया
22 साल पुरानी घटना का जिक्र करते हुए जेनी ने बताया, 'मैं देहरादून मॉडलिंग करने आई थी। कोई काम नहीं मिलने पर एक एसटीडी बूथ पर काम किया। हरक सिंह रावत के कार्यकर्ता से मिली थी। मैंने उनसे कहा था कि अगर कोई काम हो तो बताना? इसके बाद एक कार्यकर्ता काम दिलाने के नाम पर यमुना कॉलोनी स्थित रावत के आवास पर ले गया।'
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रावत ने कहा- मेरे घर पर छोड़ दो
जेनी ने कहा, 'मुझसे बताया गया कि टिहरी गढ़वाल स्थित एक संस्था में काम करना है। इसके बाद उन लोगों ने कहा कि हम किसी मंत्री से मिलने जा रहे हैं। मैंने कहा कि हम भी चलेंगे। वे लोग हमें वहां ले गए। वहां पहुंचने पर हरक सिंह रावत ने कहा कि इनको कहां पहाड़ों पर ले जाओगे? इनको मेरे घर पर छोड़ दो। तब मैं वहां पर रुकी।'
जेनी ने कहा कि मैं उस वक्त छोटी थी। पहली बार जब मैं यहां आई थी तो 100-200 पुलिसवालों ने मुझे यहां से निकाल दिया और कहा कि दोबारा मत आना। पागलखाने में रहने से अच्छा कि अपना बेटा लेकर जाऊंगी। उस वक्त मुझे बोला गया कि तुम्हें जेल हो जाएगी और तुम्हारी कोई नहीं सुनेगा।