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'मैं जिंदा हूं साहब, राशन कार्ड बनवा दीजिए', कागजों में मरी महिला पहुंची HC

यूपी के प्रयागराज जिले में अधिकारियों की लापरवाही से जीवित महिला को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया। जिले स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर पीड़िता ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई है।हाईकोर्ट ने डीएम सहित अधिकारियों को तलब किया है।

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प्रतीकात्मक फोटो,Photo Credit : Chat GPT

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सरकारी कागजों में खुद को मृत घोषित किए जाने से परेशान एक महिला न्याय की गुहार लेकर हाईकोर्ट पहुंच गई। महिला ने अदालत में कहा कि वह पूरी तरह जीवित है, लेकिन सरकारी अभिलेखों में मृत दर्ज होने के कारण उसका राशन कार्ड नहीं बन पा रहा है और सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने जिले के आला अधिकारियों को तलब कर जवाब मांगा है।

 

मामला प्रयागराज के प्रतापपुर क्षेत्र के हंडिया स्थित वारी गांव का है। यहां की रहने वाली चंदा देवी ने हाईकोर्ट में गुहार लगाते हुए बताया कि उनके पति साधुराम का निधन हो चुका है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें भी मृत दर्ज कर दिया गया है।

 

चंदा देवी के मुताबिक वह जीवित हैं और इसके बावजूद सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्ज होने की वजह से उनका राशन कार्ड नहीं बन पा रहा। इससे वह सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हैं। महिला का कहना है कि समस्या ठीक कराने के लिए वह कई बार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा चुकी हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

 

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मजबूरी में हाईकोर्ट की शरण

अधिकारियों से राहत नहीं मिलने के बाद चंदा देवी को न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने की।महिला की स्थिति सुनकर अदालत ने मामले को गंभीर माना। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई जीवित व्यक्ति सरकारी अभिलेखों में मृत दर्ज है तो यह महज प्रशासनिक गलती नहीं है, बल्कि उसके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला है।

DM-SDO और ग्राम प्रधान को किया तलब

हाईकोर्ट ने प्रयागराज के जिलाधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी और प्रतापपुर-हंडिया के वारी गांव के ग्राम प्रधान को स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है।अदालत ने अधिकारियों से पूछा है कि आखिर जीवित महिला को नागरिक आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड में मृत किस आधार पर दर्ज किया गया। यदि यह गलती थी तो अब तक सरकारी अभिलेखों में सुधार क्यों नहीं किया गया?अदालत ने अगली सुनवाई के दौरान चंदा देवी को भी मौजूद रहने का निर्देश दिया है। साथ ही डीएम और जिला पूर्ति अधिकारी को यह सत्यापित करने को कहा गया है कि चंदा देवी वास्तव में साधुराम की विधवा हैं या नहीं।

 

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अब अधिकारियों को देना होगा जवाब

मामले में अब जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय होने की स्थिति बन गई है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि जीवित महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज करने की गलती कैसे हुई और शिकायतों के बावजूद उसे समय रहते ठीक क्यों नहीं किया गया।
एक सरकारी रिकॉर्ड की गलती ने चंदा देवी को राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं के लाभ से दूर कर दिया। अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अधिकारियों को अदालत में इस पूरे मामले का जवाब देना होगा।


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