यूपी के जालौन में करीब तीन महीने पहले हरियाणा के कारोबारी के अपहरण और हत्या के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के पीछे प्रेम संबंध, करोड़ों रुपये की जमीन का विवाद और कथित सुपारी किलिंग की साजिश सामने आई है। कारोबारी की हत्या के बाद पहचान मिटाने के लिए शव को हमीरपुर के जंगल में ले जाकर डीजल डालकर जलाने का आरोप है। मामले में पुलिस ने 50-50 हजार रुपये के इनामी आरोपी मोहित मलिक और उसकी पत्नी सपना रानी को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
पुलिस के अनुसार, 4 मई 2026 की सुबह हरियाणा के जींद निवासी 52 वर्षीय विजेंद्र सिंह मोर का उरई कोतवाली क्षेत्र के रिकनिया गांव स्थित ट्यूबवेल से अपहरण किया गया था। आरोप है कि बदमाशों ने उन्हें क्रेटा कार में बैठाकर अगवा किया और बाद में उनकी हत्या कर दी।हत्या के बाद शव को हमीरपुर जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र के कूपरा जंगल में ले जाया गया। पुलिस का दावा है कि वहां करीब 40 लीटर डीजल डालकर शव जला दिया गया, जिससे मृतक की पहचान और हत्या से जुड़े साक्ष्य मिटाए जा सकें।
जंगल से मिलीं अधजली हड्डियां
मामले की जांच में जुटी पुलिस ने लगातार सुराग जुटाए। 29 जुलाई को पुलिस ने हरियाणा निवासी मोहित मलिक और उसकी पत्नी सपना रानी को कदौरा थाना क्षेत्र के चितैला फार्म हाउस से गिरफ्तार कर लिया।पुलिस के मुताबिक, मोहित की निशानदेही पर हमीरपुर के जंगल से मृतक की अधजली हड्डियां और शव पर लपेटी गई चादर का टुकड़ा बरामद किया गया। बरामदगी को जांच में अहम साक्ष्य माना जा रहा है।
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पहले सपना से थे विजेंद्र के संबंध
पुलिस पूछताछ में हत्या की साजिश की एक अहम कड़ी सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, मृतक विजेंद्र के आरोपी महिला सपना रानी से पहले प्रेम संबंध थे। बाद में सपना ने विजेंद्र से संबंध खत्म कर मोहित मलिक से शादी कर ली।पुलिस का दावा है कि इसके बाद विजेंद्र कथित तौर पर मोहित और सपना को धमकाता था। इसी बीच जमीन को लेकर चल रहा विवाद भी सामने आया, जिसके बाद हत्या की साजिश रचे जाने की बात पुलिस जांच में सामने आई है।
5 करोड़ की जमीन का विवाद भी बना वजह
पुलिस के अनुसार, विजेंद्र का हरियाणा के आजाद सरपंच से करीब पांच करोड़ रुपये की जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि जमीन बेचने के बाद विजेंद्र को करीब एक करोड़ रुपये मिले थे, जबकि बाकी रकम को लेकर विवाद था।पुलिस का दावा है कि इसी रकम से बचने के लिए आजाद सरपंच ने अन्य लोगों को साझेदारी का लालच दिया और विजेंद्र की हत्या की कथित सुपारी दी गई। पुलिस के मुताबिक, वारदात से करीब 15 दिन पहले मोहित और सपना ने घटनास्थल की रेकी भी की थी।
जांच के मुताबिक, कारोबारी का अपहरण करने के बाद उसकी हत्या की गई। इसके बाद शव को हमीरपुर के जंगल में ले जाकर करीब 40 लीटर डीजल डालकर जला दिया गया। आरोपियों का मकसद पहचान मिटाना और हत्या के सबूत खत्म करना बताया जा रहा है।हालांकि, पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और लगातार की गई विवेचना से मामले की कड़ियां जोड़ने में सफलता मिली।
पुलिस टीम के साथ हुआ था हादसा
इस हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस टीम के साथ भी दर्दनाक हादसा हुआ था। पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह के अनुसार, 5 मई को आरोपियों की तलाश में हरियाणा गई उरई कोतवाली पुलिस के दो उपनिरीक्षकों, दो आरक्षियों और मुकदमे के वादी अमरीक सिंह के चालक की नूंह में सड़क हादसे में मौत हो गई थी।इसके बावजूद पुलिस ने जांच जारी रखी और आरोपियों तक पहुंचने के लिए लगातार काम किया।
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50-50 हजार रुपये का इनाम था घोषित
पुलिस के मुताबिक, हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपियों पर झांसी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक की ओर से 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। अब मोहित और सपना की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उनकी भूमिका और अन्य आरोपियों के संबंध में पूछताछ कर रही है।पुलिस के अनुसार, इस हत्याकांड में अभी कई आरोपी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस जमीन विवाद में पैसों के लेनदेन, कथित सुपारी, अपहरण, हत्या और शव को जलाने की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।