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नेपाल की सख्ती, भारत की दरियादिली; इन महिलाओं को मिलेगी नागरिकता

नेपाल सरकार ने भारत से 100 नेपाली रुपये से अधिक का सामान लाने पर सख्ती शुरू कर दी है। सीमावर्ती इलाके में इससे आक्रोश है। वहीं बिहार में शादी करने वाली नेपाली मूल की महिलाओं को नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया है। आइये जानते हैं पूरा मामला?

Nepal News

सांकेतिक फोटो। (AI Generated Image)

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संजय सिंह, पटना। वर्षों से एक ही घर में रहकर भी अपनी पहचान के लिए तरस रहीं सीमावर्ती इलाकों की नेपाली मूल की बहुओं के लिए अब बड़ी खुशखबरी है। शादी के बाद भारत आईं इन महिलाओं ने परिवार तो संभाला, रिश्ते निभाए, लेकिन कागजों में उनकी पहचान अधूरी ही रही। अब सरकार के नए फैसले ने इस अधूरेपन को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है। सात साल या उससे अधिक समय से विवाहित महिलाओं को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन का मौका देकर उनके जीवन में नई रोशनी लाई गई है।

 

पश्चिम चंपारण जिले के सिकटा प्रखंड में इस पहल को जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। गांव-गांव में इसकी चर्चा है और महिलाओं के चेहरे पर लंबे इंतजार के बाद राहत और खुशी साफ झलक रही है। यह सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि हजारों महिलाओं के आत्मसम्मान और अधिकार से जुड़ा सवाल है, जो अब सुलझने लगा है।

 

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इनकी सहायता ले रहा प्रशासन

प्रखंड प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय नेटवर्क को मजबूत किया है। जीविका दीदियां, विकास मित्र, चौकीदार और दफादार घर-घर जाकर महिलाओं को योजना की जानकारी दे रहे हैं। वे न सिर्फ आवेदन की प्रक्रिया समझा रहे हैं, बल्कि जरूरी दस्तावेजों की सूची भी साझा कर रहे हैं, ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी न हो। यह प्रयास इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस पहल को केवल घोषणा तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे हर पात्र महिला तक पहुंचाना चाहता है।

लगाए जाएंगे विशेष कैंप

प्रखंड विकास पदाधिकारी अजीत कुमार रौशन के अनुसार 24 अप्रैल को प्रखंड मुख्यालय सहित विभिन्न पंचायतों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में महिलाओं को आवेदन की पूरी सुविधा एक ही जगह मिलेगी। ऑनलाइन आवेदन के साथ-साथ आरटीपीएस काउंटर पर फॉर्म जमा करने की व्यवस्था भी रहेगी। महिलाएं निर्धारित वेबसाइट पर अपनी जानकारी भरकर उसका प्रिंट निकालेंगी और संबंधित काउंटर पर जमा करेंगी।

 

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आवेदन शुल्क 1000 रुपये तय किया गया है और इसके साथ जरूरी दस्तावेज लगाना अनिवार्य होगा। जिन महिलाओं को ऑनलाइन प्रक्रिया में दिक्कत होती है, उनके लिए साइबर कैफे और सीएससी सेंटर सहारा बनेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तकनीकी बाधाएं किसी के सपनों के बीच न आएं।

सरकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ 

इस फैसले के बाद स्थानीय महिलाओं में खुशी का माहौल है। कई महिलाओं का कहना है कि अब उन्हें वह पहचान मिलने जा रही है, जिसका वे वर्षों से इंतजार कर रही थीं। अब वे भी पूरे अधिकार और सम्मान के साथ खुद को भारतीय नागरिक कह सकेंगी। यह कदम न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को सशक्त बनाएगा, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं और अधिकारों का लाभ उठाने का भी अवसर देगा।


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