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केन-बेतवा जोड़ने का विरोध, चिता पर लाश की तरह लेट गईं महिलाएं

छतरपुर जिले में केन बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट का कार्य हो रहा था, जिसके विरोध में आदिवासी महिलाओं ने चिता आंदोलन किया। पुलिसकर्मी इस आंदोलन को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

 Ken Betwa River Link Project women protest

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Sora

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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन बेतवा नदी जोड़ने की प्रोजेक्ट को लेकर आदिवासी महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सुर्खियां बटोर रही हैं क्योंकि इस प्रदर्शन में महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से चिता पर लाश की तरह लेटकर विरोध कर रही थीं, जिसके जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि वे अपनी मौत के बाद भी इस प्रोजेक्ट का विरोध करेंगी। विरोध प्रदर्शन में महिलाओं के साथ आदिवासी पुरुष, किसान और बच्चे भी शामिल थे।

 

यह विरोध प्रदर्शन गुरुवार को हुआ, जहां पन्ना और छतरपुर के किसानों ने अपने जिले में प्रोजेक्ट का विरोध किया। इस दौरान कई आदिवासी महिलाएं अपने बच्चों को गोद में लेकर चिता आंदोलन कर रही थीं। इस आंदोलन को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस ने कई कोशिशें कीं लेकिन आदिवासी महिलाएं टस से मस नहीं हुईं और आंदोलन करती रहीं। इस आंदोलन का समर्थन जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर कर रहे थे, जिन्होंने कहा कि आदिवासी महिलाएं शुक्रवार को भी चिता आंदोलन जारी रखेंगी।

 

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केन बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट क्या है?

इस प्रोजेक्ट में मध्य प्रदेश की केन नदी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी से जोड़ने का काम हो रहा है ताकि उन क्षेत्रों में भी पानी पहुंचाया जा सके जहां पानी की कमी है और वहां के खेतों की सिंचाई हो सके। इसमें दौरान बांध बनाया जाएगा, जो करीब 200 किलोमीटर लंबा नहरों का जाल तैयार करेगा। इस बांध के जरिए बिजली उत्पादन का भी प्लान है।

 

अधिकारियों का दावा है कि इस प्रोजेक्ट का लाभ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लोग उठा पाएंगे। इसके जरिए 10 लाख हेक्टेयर से ज्यादा खेतों की सिंचाई हो सकेगी, नदियों के पानी से बिजली का निर्माण होगा और लगभग 62 लाख लोगों को पीने का पानी मिल पाएगा।

 

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विरोध प्रदर्शन की वजह क्या है?

केन नदी के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि सरकार उनके मूलभूत समस्या जैसे जंगल, जमीन और विस्थापन जैसी समस्याओं पर काम नहीं कर रही है। इस वजह से वे इस प्रोजेक्ट का समर्थन नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि वे अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए दिल्ली जाना चाहते थे लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन्हें जाने से रोक लिया। इसके अलावा लोगों का आरोप है कि उनके गांवों और बस्तियों में खाने से लेकर पानी की आपूर्ति बाधित कर दी गई है, साथ ही उन्हें धमकियां दी जा रही हैं कि वे विरोध प्रदर्शन न करें।

 

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