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'100 करोड़ की मालकिन बनूंगी', रेलवे अफसर पिता की मदद से की ठगी, कई बने शिकार

उत्तर प्रदेश की एक महिला अरबपति होने का सपना देखती थी और अपनी डायरी में लिखती थी। अरबपति बनने के लिए उसने अपने रेलवे अधिकारी पिता की मदद से ठगी शुरू की और कई लोगों को शिकार बनाया।

Garima and her father arrested

ठगी के आरोपी बाप-बेटी गिरफ्तार, Photo Credit: Social Media

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में करोड़पति और फिर अरबपति बनने की चाह में एक महिला ने ऐसा काम किया जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। महिला ने अरबपति बनने का सपना देखा और इसके लिए उसने अपने रेलवे अधिकारी पिता की मदद से ठगी करना शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, रेलवे अधिकारी की बेटी गरिमा सिंह ने बैंक से लोन दिलाने और उसे माफ कराने का झांसा देकर 10 से अधिक लोगों से करीब 1.67 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। मामले में पुलिस ने गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

 

पुलिस जांच के दौरान गरिमा सिंह के पास से एक डायरी भी बरामद हुई है। डायरी में उसने लिखा था, 'मैं गरिमा सिंह, अप्रैल 2026 तक अरबपति बनूंगी। यह मेरा लक्ष्य है। मेरे सभी लोन अप्रैल से मई तक खत्म हो जाएंगे। अप्रैल से मई तक मेरा लक्ष्य 100 करोड़ रुपये कमाना है। गरिमा सिंह करोड़पति है। धन्यवाद भगवान।' पुलिस का कहना है कि डायरी से यह पता चलता है कि वह रोज अपने करोड़पति और अरबपति बनने के सपने देखती थी और उन्हें अपनी डायरी में लिखती थी। 

 

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अरबपति बनने के लिए ठगी

गोरखपुर के एम्स थाना क्षेत्र की महादेवी झारखंडी कॉलोनी में रहने वाले ध्रुव नारायण सिंह सहजनवा रेलवे स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक हैं। उनकी बेटी गरिमा सिंह की शादी साल 2020 में कुशीनगर के सुकरौली निवासी भानू प्रताप सिंह से हुई थी। भानू प्रताप ठेकेदारी का काम करता था। उनके दो बच्चे हैं, जिनमें एक करीब तीन साल और दूसरा तीन महीने का है।

 

पुलिस के अनुसार, ठेकेदारी का काम कमजोर पड़ने के बाद करीब दो साल पहले भानू प्रताप अपनी पत्नी के साथ ससुराल में रहने लगा। इसी दौरान गरिमा ने जल्दी अमीर बनने की योजना बनाई। पूछताछ में सामने आया कि उसने इंटरनेट, यूट्यूब के जरिए धोखाधड़ी के तरीकों के बारे में जानकारी जुटाई और फिर बैंक लोन के नाम पर लोगों को फंसाने की योजना बनाई।

अपने जानकारों को ही बनाया निशाना

पुलिस के मुताबिक, गरिमा ने ठगी के धंधे की शुरुआत अपने परिचित लोगों से की। उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह भी इस काम में उसकी मदद करने लगे। रेलवे में जिन लोगों ने पहले से लोन लिया था या जिन्हें लोन की जरूरत थी, उनसे ध्रुव नारायण ने गरिमा की मुलाकात कराई। इसके बाद गरिमा उन्हें अपने जाल में फंसाती थी। वह लोगों को समझाती थी कि वे नया लोन ले लें और उसकी किस्त वह खुद जमा करेगी। बैंक से जितनी रकम का लोन मंजूर होता, उसमें से 10 से 20 प्रतिशत रकम संबंधित व्यक्ति को देकर बाकी पैसा अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करा लेती थी।

कैसे हुआ खुलासा?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 1 अगस्त को रेलवे कर्मचारी सत्यप्रकाश सिंह ने एम्स थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि स्टेशन अधीक्षक ध्रुव नारायण सिंह ने उनकी मुलाकात अपनी बेटी गरिमा से कराई थी। उस समय सत्यप्रकाश पर कार लोन चल रहा था। शिकायत के मुताबिक, गरिमा ने दावा किया कि वह उनका कार लोन आसानी से खत्म करवा देगी। इसके लिए उसने पहले नया पर्सनल लोन लेने की सलाह दी। उसने सत्यप्रकाश के दस्तावेज लेकर आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, यस बैंक, एसबीआई, एसएमएफजी और बंधन बैंक समेत छह बैंकों से कुल 1.67 करोड़ रुपये का लोन मंजूर करा लिया।

 

इसके बाद उसने कहा कि पूरी ईएमआई वह खुद जमा करेगी और कार लोन भी खत्म करवा देगी। भरोसा दिलाने के लिए उसने करीब 10 लाख रुपये सत्यप्रकाश के खाते में भी भेजे और कहा कि यह उनका फायदा है। उसने शुरुआत के करीब तीन महीने तक सभी ईएमआई समय पर जमा भी की।

बाद में किस्तें देना बंद किया

सत्यप्रकाश सिंह के अनुसार, तीन महीने बाद गरिमा ने ईएमआई जमा करना बंद कर दिया। इसके बाद बैंकों से लगातार फोन आने लगे। जब उन्होंने गरिमा से संपर्क किया तो वह हर बार टालमटोल करती रही और कहती रही कि चिंता करने की जरूरत नहीं है, सब ठीक हो जाएगा। लेकिन जब किस्तें लगातार नहीं जमा हुईं तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी।

 

शिकायत के आधार पर पुलिस ने गरिमा सिंह, उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह, पति भानू प्रताप सिंह, सहयोगी विशाल यादव, राजेंद्र कुमार, चंद्रप्रकाश, दिनकर मणि त्रिपाठी और संजय सिंह उर्फ जयप्रकाश सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

 

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कितने लोग हुए शिकार

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गरिमा सिंह ने मोहन सिंह, ब्रह्मानंद सिंह, डॉ. दिलीप सिंह, डॉ. परमात्मा सिंह, साधना मल्ल, सुग्रीव सिंह और संदीप पांडेय समेत कई अन्य लोगों से भी इसी तरह ठगी की। इन सभी ने पुलिस और सीओ कार्यालय में शिकायत दी है। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है।

 

एम्स थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश कर रही हैं। एसपी सिटी निमिष पाटिल ने बताया कि मामले में लगातार नई शिकायतें सामने आ रही हैं। पुलिस सभी शिकायतों की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

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