बाजार में मिलने वाले दूध, पनीर, मसाले, मिठाई, तेल और पैकेट वाले खाने-पीने के सामान में मिलावट की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं। खाने-पीने के सामान की जांच और सुरक्षा की जिम्मेदारी फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की है। FSSAI ने इसको लेकर नियम सख्त किए हैं, जांच का आंकड़ा भी बढ़ा है। फिर भी मिलावट और खराब गुणवत्ता वाले खाने, नियम तोड़ने के मामले पूरी तरह नहीं रुक रहे हैं। वहीं दूसरी सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में खाने-पीने की चीजों की जांच करने वाले करीब 30 फीसदी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पद खाली हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जांच करने वाले अधिकारी ही पर्याप्त नहीं होंगे, तो बाजार में मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर पूरी तरह प्रभावी रोक कैसे लग पाएगी।
बता दें कि FSSAI पूरे देश के लिए खाने-पीने की चीजों के नियम बनाती है और उन पर नजर रखती है। जांच का काम राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा अधिकारी करते हैं। ये अधिकारी FSSAI के बनाए नियमों को लागू करते हैं। यही अधिकारी दुकानों, फैक्ट्रियों, होटल और रेस्टोरेंट में जाकर जांच करते हैं। अगर किसी खाने की चीज पर शक होता है, तो उसका नमूना लेकर लैब में जांच के लिए भेजते हैं। अगर मिलावट या नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
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खाने की जांच करने वाले अफसरों की भारी कमी
सरकार ने लोकसभा में बताया कि देश में फूड सेफ्टी ऑफिसर Food Safety Officer (FSO) के 4,208 स्वीकृत पद हैं लेकिन इनमें से केवल 2,997 अधिकारी कार्यरत हैं। यानी 1,211 पद खाली हैं। ऐसे में देखा जाए तो कुल स्वीकृत पदों का करीब 28.8 प्रतिशत पद खाली है। इसके अलावा, 718 Designated Officer के पदों में से 668 पर अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 50 पद अभी भी खाली हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर जांच करने वाले अधिकारियों की संख्या कम होगी, तो बाजार में नियमित जांच करना, खाने-पीने की चीजों के नमूने लेना और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करना मुश्किल हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा के नियम तभी सही तरीके से लागू हो सकते हैं, जब जांच करने वाले पर्याप्त प्रशिक्षित अधिकारी मौजूद हों। केवल सख्त नियम बना देने या कार्रवाई से समस्या का हल नहीं होगा।

बढ़ते खाद्य कारोबार के साथ बढ़ा निगरानी का दबाव
FSSAI पूरे देश में खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा का ध्यान रखती है। यह तय करती है कि बाजार में बिकने वाला खाना सुरक्षित हो, उस पर सही जानकारी लिखी हो और लोग मिलावटी सामान न बेचें। इसके लिए FSSAI नियम बनाती है और राज्यों के साथ मिलकर काम करती है। लेकिन पूरे देश के मुकाबले इसके क्षेत्रीय दफ्तर कम हैं। बाजार में दुकानों, होटल, रेस्टोरेंट और फैक्ट्रियों की जांच करने का काम राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारी करते हैं। अगर इन अधिकारियों की संख्या कम होगी या जांच ठीक से नहीं होगी, तो मिलावट करने वालों पर नजर रखना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना मुश्किल हो सकता है। सरकार ने भी माना है कि देश में पंजीकृत खाद्य कारोबारों (Food Business Operators) की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से खाली पद भरने और जरूरत के अनुसार नए पद बनाने को कहा गया है, ताकि बढ़ते खाद्य कारोबारों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
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FSSAI क्या कर रही है?
FSSAI ने लैब और जांच का इंतजाम और ज्यादा बढ़ाया है। इसके तहत देश में 252 फूड टेस्टिंग लैब, अपील के लिए 24 अलग रेफरल लैब और 305 मोबाइल लैब गाड़ियां (फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स) अलग-अलग राज्यों में मौके पर जांच करती हैं। कुछ नियमों में भी बदलाव किया गया है। नए नियमों में साफ और सही लेबल लगाना अनिवार्य (2020 का नियम), रोज़ाना 50 लीटर से ज्यादा तेल में तलने वाली दुकानों को इस्तेमाल किए तेल का रिकॉर्ड रखना जरूरी, बहुत ज्यादा बार इस्तेमाल हो चुके (25% से ज्यादा खराब) तेल पर रोक, शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-11-2100, या वेबसाइट foscos.fssai.gov.in पर शिकायत की सुविधा दी गई है।
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आंकड़े क्या बताते हैं?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन साल में हर साल करीब 1.7 लाख खाद्य नमूनों की जांच की गई। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने के मामले बढ़े हैं। 2022-23 में 28,464 सिविल केस थे, जो 2024-25 में बढ़कर 30,142 हो गए। इसके अलावा, क्रिमिनल केस करीब 1,200 के आसपास बने रहे। दूसरी ओर, लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई 533 से घटकर 220 रह गई। यानी जांच और कार्रवाई जारी है, लेकिन ज्यादातर मामलों में जुर्माना लगाया गया, जबकि लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई अपेक्षाकृत कम हुई।